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श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

श्रीगणेश पुराण (उपासना व क्रीडा खण्ड - गीताप्रेस विशेषाङ्क)

Ganesha Purana Gita Press Special Edition

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished656 पृष्ठ

पृष्ठ 483, कुल 656 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 483

क्री०ख०-अ०९० ] * बालक गुणेशके द्वारा बारहवें मासमें दैत्योंका वध * ४८१
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समान लाल रंगके थे। उसके सींग बादलोंको स्पर्श | अपने बालक गुणेशसे बोलीं—हे पुत्र! किसी भी जीवकी
करनेमें समर्थ थे। वह तीनों लोकोंको ग्रसता हुआ-सा | हत्या नहीं करनी चाहिये, इस प्राणीको तुम छोड़ दो।
उस बालक गुणेशके समीपमें आया ॥ २२-२४ ॥ | तब भी बालक गुणेशने हठ करके बलपूर्वक उस
वह जहाँ-जहाँ जाता था, उसे पकड़नेके लिये बालक | असुरको पत्थरपर पटक डाला ॥ २९-३० ॥
गुणेश भी वहीं-वहीं जाते थे। इस प्रकारसे महान् वेगशाली | उस समय उसके सौ टुकड़े हो गये और वह
वे दोनों बहुत समयतक इधर-उधर घूमते रहे। तदनन्तर | आकाशको गर्जनासे गुँजाता और घरों तथा तोरणोंको
बालक गुणेश जब थक गये, तब वे बहुत वेगसे दौड़ते हुए | गिराता हुआ भूमिपर गिर पड़ा ॥ ३१ ॥
उस असुरके पास गये और उन्होंने उस महान् बलशाली | उसका शरीर दस योजन विस्तारवाला हो गया। उस
शलभासुरको एकाएक पकड़ लिया ॥ २५-२६ ॥ | समय उसके मुखसे बहुत-सारा रक्त बह चला। वह बहुत-
वह अपने दोनों पंखोंको उसी प्रकार फड़फड़ाने | से आश्रमों तथा वृक्षोंको चूर-चूर करते हुए गिरा। तब
लगा, जैसे कि किसी मनुष्यके द्वारा हाथमें पकड़ा हुआ | माता अपने पुत्रको पकड़कर वहाँसे ले गयी और उस
बाज पक्षी अपने पंख फड़फड़ाने लगता है। वह | बालकको गोदमें बैठाकर अपना स्तनपान कराया तथा
शलभासुर अपने पैरोंके प्रहारसे बालकको पीड़ित करने | भोजन कराया। उस बालक गुणेशको तथा उस प्रकारके
लगा। उस समय वह असुर अपनी विकराल आँखोंको | विस्तृत शरीरवाले मरे हुए दैत्यको देखकर उन पर्वतराजपुत्री
फाड़-फाड़कर उस शिशु गुणेशको देखने लगा। वह | पार्वतीसे सखियाँ कहने लगीं—बहुत अच्छा हुआ, बहुत
बालक गुणेश उसको छोड़ दे रहा था, फिर पकड़ ले | अच्छा हुआ। तदुपरान्त पार्वतीने अपने भवनमें प्रवेश किया
रहा था ॥ २७-२८ ॥ | और वे सखियाँ भी प्रसन्नचित्त होकर अपने-अपने घरोंको
वह उसे अपनी माताको दिखाता था और फिर | गयीं। देवी पार्वतीकी आज्ञामें रहनेवाले गणोंने उस दैत्यको
धरतीपर पटक दे रहा था। उसको देखकर दयाके | दूर ले जाकर फेंक दिया। उस समय देवगणोंने उस बालक
वशीभूत हो पार्वती उस समय कठोर हुए मनवाले उस | गुणेशके ऊपर पुष्पोंकी वर्षा की ॥ ३२-३५ ॥
॥ इस प्रकार श्रीगणेशपुराणके क्रीडाखण्डमें 'शलभासुरके वधका वर्णन'
नामक नवासीवाँ अध्याय पूर्ण हुआ ॥ ८९ ॥
ন্দ্ৰ
नब्बेवाँ अध्याय
बालक गुणेशके द्वारा बारहवें मासमें नूपुर तथा अविपुत्र नामक दैत्योंका वध
ब्रह्माजी बोले— बारहवें मासकी बात है। एक | शब्दोंका उच्चारण करते हुए नृत्य करने लगे ॥ २-३ ॥
दिन देवी पार्वती विविध अलंकरणोंसे अलंकृत करके | बालक गुणेशके उस प्रकारके शब्दको सुनकर
अपने अद्भुत पुत्र बालक गुणेशको गोदमें लेकर अपनी | भगवान् शिव भी नृत्य करनेके लिये वहाँ आ पहुँचे।
सखियोंके साथ बैठी हुई थीं ॥ १ ॥ | भगवान् शिवको नृत्य करते हुए देखकर श्रीविष्णु स्वयं
उस समय गुणेशकी आभा करोड़ों सूर्योंकी प्रभासे | भी नृत्य करने लगे। तदनन्तर इन्द्र आदि सभी देवता भी
सम्पन्न थी और वे करोड़ों आभूषणोंसे विभूषित थे। उस | नृत्यकी अभिलाषासे वहाँ आ पहुँचे। वह बालक जिस
समय माताको पुत्रके नृत्यके दर्शनकी महान् उत्कण्ठा | प्रकारसे नृत्य कर रहा था, उसी प्रकारसे वे सब भी
हुई। अन्य बालकों तथा भगवान् शिवकी भी नृत्य- | नाचने लगे ॥ ४-५ ॥
दर्शनकी इच्छा जानकर वे गिरिजापुत्र गुणेश 'थेयि थेयि' | वह गुणेश जिस भावको प्रकट कर रहा था, वे