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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 90

भाषाटीकासमेत । (८९)
देवा मनुष्या नागाद्याः खलास्त्वदुदरेशयाः ॥
नानायोनिभुजश्चान्ते त्वय्येव विशंति च १८
देवता मनुष्य नागादि और खल (दुष्ट) तुम्हारे उदरमें
शयन करते हैं जो अनेक योनियोंको भोगकर अन्तमें तुममें
प्रवेश करते हैं ॥ १८ ॥
अब्धेरुत्पद्यमानास्ते यथा जीमूतबिन्दवः ॥
त्वमिन्द्रोऽग्निर्यमश्चैव निर्ऋतिर्वरुणो मरुत् १९॥
जैसे सागरसे उत्पन्न हुए मेघके जलबिन्दु फिर उसीमें
लीन होते हैं इसी कारण इन्द्र, अग्नि, यम, निर्ऋति, वरुण,
वायु, तुमही हो ॥ १९ ॥
गुह्यकेशस्तथेशानः सोमः सूर्योऽखिलं जगत् ॥
नमामि त्वामतः स्वामिन्प्रसादं कुरु मेऽधुना २०
कुबेर, ईशान, सोम (चंद्र) और सम्पूर्ण जगत् सब
तुमही हो, हे स्वामी ! मैं तुमको नमस्कार करता हूं, अब
आप मेरे ऊपर कृपा करो ॥ २० ॥
दर्शयस्व निजं रूपं सौम्यं यत्पूर्वमीक्षितम् ॥
को वेद लीलास्ते भूमन् क्रियमाणा निजेच्छया २१