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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 130 में से

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पृष्ठ 82

भाषाटीकासमेत। ( ८१ )
वह सहस्र कल्पवर्ष तक नरकमें पडकर सदा दुःख भोगता
है, प्रथम भूतशुद्धि करके फिर प्राणायाम करे ॥ १४ ॥
आकृष्य चेतसो वृत्तिं ततो न्यासमुपक्रमेत् ॥
कृत्वान्तर्मातृकान्यासं बहिश्चाथ षडङ्गम् १५
फिर चित्तकी वृत्तियोंको आकर्षण करके न्यास करे, फिर
मातृका न्यासकरे, फिर बहिरङ्ग षडङ्ग न्यास करे ॥ १५ ॥
न्यासं च मूलमंत्रस्य ततो ध्यात्वा जपेन्मनुम् ॥
स्थिरचित्तो जपेन्मन्त्रं यथा गुरुमुखागतम् १६॥
इसके उपरान्त मूलमंत्रका न्यास करके ध्यान करे और
स्थिरचित्तसे गुरुमुखसे सुने मंत्रका जप करे ॥ १६ ॥
जपं निवेद्य देवाय स्तुत्वा स्तोत्रैरनेकधा ॥
एवं मां य उपासीत स लभेन्मोक्षमव्ययम्॥१७॥
फिर देवताके निमित्त जपको निवेदन कर अनेक प्रकारसे
स्तोत्रका पाठ करे इस प्रकारसे जो मेरी उपासना करता है
वह सनातनी मुक्तिको प्राप्त होता है ॥ १७ ॥
य उपासनया हीनो धिङ्नरो व्यर्थजन्मभाक् ॥
यज्ञोऽहमौषधं मन्त्रोऽग्निराज्यं च हविर्हुतम् १८॥