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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 80

भाषाटीकासमेत । ( ७९ )
जो मुझे सम्यक् प्रकारसे उपासना करते हैं, वे परब्रह्मको
प्राप्त होते हैं ध्यान पूजन और पंचामृतादि ॥ ६ ॥
स्नानवस्त्राद्यलंकारसुगन्धधूपदीपकैः ॥
नैवेद्यैः फलताम्बूलैर्दक्षिणाभिश्च योऽर्चयेत् ॥७॥
तथा स्नान, वस्त्र, अलंकार, उत्तम प्रकार गंध, धूप, दीप,
नैवेद्य, फल, ताम्बूल, दक्षिणादिसे जो मेरी पूजा करता है ॥७॥
भक्त्यैकचेतसा चैव तस्येष्टं पूरयाम्यहम् ॥
एवं प्रतिदिनं भक्त्या मद्भक्तो मां समर्चयेत् ॥८॥
भक्ति तथा एकचित्तसे जो मेरा भजन करता है मैं उसके
मनोरथ पूरे करता हूं इसप्रकार प्रतिदिन भक्तिसे मेरे भक्त
मेरी पूजा करते हैं ॥ ८ ॥
अथवा मानसी पूजां कुर्वीत स्थिरचेतसा ॥
अथवा फलपत्राद्यैः पुष्पमूलजलादिभिः ॥९॥
अथवा स्थिरचित्तसे मानसी पूजा करै, अथवा फल पत्र
पुष्प मूल जलसे ॥ ९ ॥
पूजयेन्मां प्रयत्नेन तत्तदिष्टं फलं लभेत् ॥
त्रिविधास्वपि पूजासु श्रेयसी मानसी मता १०