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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 61

( ६० ) गणेशगीता अ० ४.
ऋषियोंने जो कि बडे चतुर और मुनि हैं, उसके तीन भेद
कहे हैं ॥ २७ ॥
प्रमाणं भेदतो विद्धि लघुमध्यममुत्तमम् ॥
दशभिद्वर्यधिकैर्वर्णैः प्राणायामो लघुः स्मृतः२८
प्रमाणके भेदसे प्राणायाम लघु, मध्यम और उत्तम ऐसे
तीनप्रकारका है, बारह अक्षरका प्राणायाम लघु कहाता है२८
चतुर्विंशत्यक्षरो यो मध्यमः स उदाहृतः ॥
षट्त्रिंशल्लघुवर्णो य उत्तमः सोऽभिधीयते॥२९॥
चौवीस अक्षरका मध्यम और ३६ छत्तीस अक्षरोंका
उत्तम है ॥ २९ ॥
सिंहं शार्दूलकं वापि मत्तेभं मृदुतां यथा ॥
नयन्ति प्राणिनस्तद्वत्प्राणापानौ सुसाधयेत्३०
सिंह व्याघ्र अथवा मतवाले हाथीको जैसे मनुष्य नम्र
करके अपने आधीन करता है, इसी प्रकार प्राण और अपान
वायुको साधै ॥ ३० ॥
पीडयन्ति मृगांस्तेन लोकान्वश्यंगतान्नृप ॥
दहत्येनस्तथा वायुः संस्तब्धोन च तत्तनुम् ३१