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श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

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एकनाथ का जन्म संत परिवार में हुआ था। उनकेपरदादा भानुदास महाराष्ट्र के
महान संत थे। उनके पुत्र थे चक्रपाणि और उनकेपुत्र थे सूर्यनारायण। एकनाथ
ने सूर्यनारायण के घर में शक १४५० में पैठण में जन्म लिया। एकनाथ को
ज्ञानेश्वर का अवतार कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ज्ञानेश्वर के कार्य को पूरा किया।
तेरहवीं सदी केअन्तिम दशक में ज्ञानेश्वर ने अपनी इहलीला समाप्त की।
एकनाथ का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था। उनकेजन्म केकुछ ही महीने बाद
उनके माता-पिता की मृत्यु हो गयी। वे अकेले रह गये तो उनकेदादा-दादी लाड़-
प्यार से उन्हें 'एका' कहकर पुकारने लगे। छठवें वर्ष ही उनका जनेऊ हो गया और
उन्हें घर में ही ब्रह्मकर्म की शिक्षा दी जाने लगी। घर में जो गुरु पढ़ाने आते थे वे
उनकी बुद्धि की तीव्रता से परेशान थे। एक दिन उन्होंने चक्रपाणीजी से कह ही
दिया, “मैने तो पेट के लिये कथा कहना सीखा था किन्तु आपका पौत्र ऐसे
जटिल प्रश्न करता है कि मैं उसका समाधान नहीं कर पाता।” बारह वर्ष की आयु
तक आते-आते उसने रामायण, महाभारत आदि पौराणिक ग्रन्थों का अध्ययन
पूरा कर लिया था। दैनिक कृत्य केउपरान्त वे भगवद्भजन में लग जाते। एक रात
वे अकेले ही शिवालय में बैठकर राम-कृष्ण हरि का मंत्र जप रहे थे कि तभी उन्हें
आत्मिक प्रेरणा हुई कि देवगढ़ जाकर जनार्दन स्वामी केचरणों में गिरना है। वे
दादा-दादी से बिना कुछ कहे ही देवगढ़ के लिये चल पड़े। तीसरे दिन प्रातःकाल
वे देवगढ़ पहुंचे। गुरु केदर्शन होते ही वे मानों गद्गद् हो गये। उन्होंने स्वयं को
उनके चरणों में सौंप दिया। यह शक संवत् १४६७ की घटना है। देवगढ़ में
एकनाथ को दत्तात्रेय केदर्शन हुए।
एकनाथजी ने विपुल ग्रन्थ रचना की जिसमे प्रमुख हैं— स्वात्मबोध, चिरंजीव
पद, आनन्द लहरी आदि। नाथभागवत आपका सबसे महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है
‘भावार्थ रामायण’ भी आपका महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।