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सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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३ : २१०-२१६,
विज्ञान ७ : ६, १८ : ८४७,
वेद-
-का मूल १८ : १४२६-१४३३,
-की उत्पत्ति १ : ७२, ९ : २७६-२७७
-परमात्मस्वरूप वर्णनमें असमर्थ
९ : ३७१, १० : ६४,
-श्रेष्ठ ९ : ३७०
वैराग्य-
-का फल १८ : ९०४,
-का स्वरूप ८ : ३७३-३७७,
१३ : ५१२-५२३, १५ : ३६-३९,
१५ : २५६-२५७, १५ : २७७
१८ : ९१८-९२१,
-की आवश्यकता १५ : ३९१-४६१,
१८ : १०४३-१०४७,
-की कठिनाई १८ : ७८२-७८९,
-शंकरका १३ : २४-२५, १८ : ७८९
शम- १८ : ८३३-८३४,
शरणता-
-का फल ९ : ८८,
१८ : १४०९-१४१५.
-के प्रकार १८ : १३१९,
१८ : १३९८-१४०५, १८ : १४१६.
शांति-
-का साधन ४ : १८९-१९१, ५ : ७१,
९ : ४२९, १८ : १३२०.
-का स्वरूप १६ : १३१-१४०
१७ : ४२४-४२६, १८ : १०८५.
शास्त्र- १६ : २९५-२९७,
१३ : ४५५-४६७, १८ : ८८८-८९३,
१८ : १४५३.
शौच १३ : ४६१-४८३,
१६ : १९७-१९८, १८ : ८३९-४०.
शौर्य १८ : ८५६-८५७.
श्रद्धा-
अश्रद्धा ४ : १९३-२०६, ९ : ५७-६१.
-का लक्षण ४ : १८७-१९१,
१६ : ४६०, १८ : ८४९-८५०.
-की व्याप्ति १७ : ६१-७७.
-तामस १७ : ७९-८२.
-राजस १७ : ७८
-सात्विक १७ : ७६-७७.
संजय-
-का आनंद १४ : ४१३-४१४,
१७ : ४२४-४३०, १८ : १६१३-१६२०.
-का भाग्य वर्णन १८ : १५७९-१५८३.
-के अष्टसात्विक भाव ९ : ५२५-५३०,
१८ : १६०२-१६०६.
-पर व्यास कृपा १८ : १६०८-१६१२.
सत्-
-नामका उपयोग १७ : ३७९-३८५.
संत २ : १२६, ३ : ६८-७४,
४ : ९३-११४, ५ : ७३-७५,
५ : १०५-१०६, ९ : १८८-१९६,
१४ : ३०८-३१८, १५ : २८४-३०५,
१५ : ५५९-५६९, १८ : १३५६.
-का संग १५ : ४२२, १८ : १६३२
-का स्तवन ५ : १३६-१४०,
१८ : १७७०-१७९१.
-स्थितप्रज्ञ २ : २९१-३६७.
सत्य- १६ : ११५-१२४.
सत्वशुद्धि- १६ : ७४-८०,
१७ : २२५-३३५.
संन्यास-
-आश्रम ६ : ४९-५०
-का महत्व १८ : ७०-७१
-का लक्षण ५ : १९-२५
-की व्याख्या १८ : ९२
-ज्ञानप्रधान १८ : २५७-२६७,
१८ : १२६०-१२६५
संपत्ति-
आसुरी-१६ : २१७-२६३.
आसुरी मनुष्यकी-९ : १७२-१८३,
१६ : २८१-३०४,
आसुरी मनुष्यकी गति ९ : १८४-१८५,
१६ : ४०५-४२२,
आसुरी सं. का परिणाम १६ : २६२,
दैवी-९ : १८८-१९४,
-का महत्त्व १६ : २०७-२१२,
का स्वरूप १६ : ५९, १६ : ६५-६७,
-की परिभाषा १६ : ६६
समचित्तत्व-२ : २६७-२८४,
१२ : १९७-२०४
४७ विषय-विश्लेषण