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सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 58

-की प्रशस्ति श्रीकृष्णसे १ : २२९, ४ :
२८-३०, ६ : १४८-१५१ ९ : ३६-४१,
१० : ५६-६१ १५ : ४४७-४५२
१५ : ५७७-५८१, १६ : २६९-२७०
-संजयकी ओरसे ४ : ७-१५, ११ : १६५-
१७५, ११ : ६४१-६४६, १७ : ४२७-
४३०, १८ : १४७०-१४७२
-ज्ञानेश्वरकी ओरसे ६ : १२०-१३०,८ :
८-१४,१८ : १६८६-१६८९
-की विरक्ति १० : १४५-१८४,११ :
५५५-६०८
-के विशेषण २ : ८-११, १२ : २०, १७ :
३१-३३
-मोहग्रस्त १।१७७-२०६, ११:४९-६१
से कृष्णका प्रेम १ : १४१-१४३,
५ : १६७-१७३, ६ : १४६,
१० : ५३-६०, ११ : ३९-४३,
१८ : २८२-२८५, १८ : १३४७-१३५१,
१८ : १३६८-१३७८,
१८ : १३८६-१३८३.
१८ : १४१८-१४२५
अलोलुप्त्व १६ : १६३-१६७
अवतार-
-का कारण ४ : ४९-५१, १० : २५२
-का कार्य ४ : ५२-५७, १० : २५३-
२५४,
-की पूर्वस्थिति ६ : ३२०-३२३,
११ : ८३-८५, ११ : १८०-१८१,
११ : ६१४-६१५, १३ : १०७२-१०७४,
१३ : ११४०-११४१,
१५ : ३१२-३१६
अवस्था-
उन्मनी ६ : ३०९-३२०,
१५ : ५३३-५४१,
जागृती १ : २४६, १८ : ४०४-४०५,
१८ : ११०४
निद्रा १८ : ३८१, १८ : ४०३,१२ : ५४०


सुषुप्ति १५ : ५२६
स्वप्न ५ : ५३-५४, ८ : ७३
असक्त बुद्धि-१३ : ५९३,
१८ : ९५६-९५९
अहंकार-
-का कार्य ३ : १७७-१७८, ३ : १८४-
१८५, ७ : १६५-१७१
१८ : १०५१, १८ - १२७४-१२७७
-का स्वरूप १३ - ७७-८३,
१३-७१४-७२७,
-की उत्पति १४ : ९२,
नाहंकृतिभाव ५ : ३८-६३,
१८ : ४०१-४२१
निरहंकार १३ : ५२४-५३३,
अहिंसा-१३ : २१७-३१०, १६ : ११४,
अक्षर-
प्रणव ८ : ११०-११८,
ब्रह्म ८ : १५-१७,
लक्षण ८ : १००-१०३, ८ : १८०-१८३, .
अज्ञान-४ : ६८-७०, १४ : १२९-३३,
-का कार्य १५ : १३८, १५ : ३४२,
१६ : ४३-५१, १८ : ३२६,
१८ : ४६०, १८ : ५४१,
-का त्याग ५ : ८३; १८ : १३९०-१३९५,
-का स्वरूप १४ : ७०-७९,
१६ : २४६-५१,
-के लक्षण १३ : ६५६-८५१,
-परमात्म विषयक ५ : ८२,
९ : १५५-१७०
आचार्योपासना-गुरुसेवा-
आचार्य-वर्णन, १३ : ३७१-४५३,
१४ : १
गुरुका प्रेम १३ : ४५५-४५७,
१५ : १९-२६
गुरुका भजन ४ : १६५-१६७,
१८ : १५६२-१५७५


ज्ञानेश्वरी ३८.