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धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary

महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished76 पृष्ठ

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हिन्दीटीकासमेता ५९
| लिख लिखने | मनु ज्ञाने | व्यध् वेधने |
| लिख | मन्यस्व | विध्य |
| लिखतम् | मन्येथाम् | विध्यतम् |
| लिखत | मन्यध्वम् | विध्यत |
| रच रचने | गण संख्याने | तनु विस्तारे |
| रचय | गणय | तनु |
| रचयतम् | गणयतम् | तनुतम् |
| रचयत | गणयत | तनुत |
| भुजपालनाभ्यवहारयोः | भिदिर् विदारणे | या प्रापणे |
| भुङ्धि | भिन्धि | याहि |
| भुङ्क्त | भिन्तम् | यातम् |
| | भिन्त | यात |
| अद् भक्षणे | जागृ निद्राक्षये | विश प्रवेशने |
| अद्धि | जागृहि | विश |
| अत्तम् | जागृतम् | विशतम् |
| अत्त | जागृत | विशत |
उपसर्गयोगे प्रवेशनार्थ विहायैवं रूपाणि
उपविश
उपविशतम्
उपविशत
इति धातुपाठः