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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 16

१।११ ] यमकवग्गो [ ५
सावत्थी ( जेतवन ) देवदत्त
९-अनिक्कसावो कासावं यो वत्थं परिदहेस्सति ।
अपेतो दमसच्चेन न स कासावमरहति ॥६॥
( अनिष्कषायः काषायं यो वस्त्रं परिधास्यति ।
अपेतो दमसत्याभ्यां न स काषायमर्हति ॥ ९॥ )
अनुवाद—जो ( पुरुष ) ( राग, द्वेष आदि ) कषायों (=मलों )
को बिना छोड़े काषाय वस्त्रको धारण करेगा, वह संयम-
सत्यसे परे हटा हुआ (है), और (वह) काषाय (धारण)
करनेका अधिकारी नहीं है।
१०-यो च वन्तकसावस्स सीलेसु सुसमाहितो ।
उपेतो दमसच्चेन स वे कासावमरहति ॥१०॥
( यश्च वान्तकषायः स्यात् शीलेषु सुसमाहितः ।
उपेतो दम-सत्याभ्यां स वै काषायमर्हति ॥ १०॥ )
अनुवाद—जिसने कषायोंको वमन कर दिया है, जो आचार (=शील)
से सुसम्पन्न, तथा संयम-सत्यसे सयुक्त है, वही काषाय
(वस्त्र) का अधिकारी है।
राजगृह ( वेणुवन ) संजय
११-असारे सारमतिनो सारे चासारदस्सिनो ।
ते सारं नाधिगच्छन्ति मिच्छासङ्कप्पगोचरा ॥११॥
( असारे सारमतयः सारे चासारदर्शिनः ।
ते सारं नाधिगच्छन्ति मिथ्यासङ्कल्पगोचराः ॥ ११॥ )