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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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राग सिन्दूरा
अथ राग सिन्दूरा 10
(गायन समय रात्रि 12 से 3)
246. परिचय । झपताल
हंस सरोवर तहाँ रमै, सुभर हरि जल नीर।
प्राणी आप पखालिये, निर्मल सदा होइ शरीर ॥ टेक॥
मुक्ताहल मन मानिया, चुगैं हंस सुजान।
मध्य निरंतर झूलिये, मधुर विमल रस पान ॥ 1 ॥
भँवर कमल रस वासना, रातो राम पीवंत।
अरस परस आनन्द करैं, तहँ मन सदा होइ जीवंत ॥ 2 ॥
मीन मगन मांहीं रहैं, मुदित सरोवर मांहिं।
सुख सागर क्रीड़ा करैं, पूरण परिमित नांहिं ॥ 3 ॥
निर्भय तहाँ भय को नहीं, विलसैं बारम्बार।
दादू दर्शन कीजिये, सन्मुख सिरजनहार ॥ 4 ॥

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