सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 205, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 205

सारग्राही
का
अंग
www.dadooram.org
अथ सारग्राही का अंग १७
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ।। 1 ।।
दादू साधु गुण गहै, औगुण तजै विकार ।
मानसरोवर हंस ज्यूं, छाड़ि नीर, गहि सार ।। 2 ।।
हंस गियानी सो भला, अन्तर राखे एक।
विष में अमृत काढ ले, दादू बड़ा विवेक ।। 3 ।।
पहली न्यारा मन करै, पीछे सहज शरीर ।
दादू हंस विचार सौं, न्यारा किया नीर ।। 4 ।।

  • 205 -