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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-श्री दादूलीला विहंगावलोकन
बढ़ाया । साथ ही वे स्वयं अपनी साधना में भी रत रहते थे । कभी - कभी
आत्म - रमण के उद्देश्य से श्री महाराजजी दीर्घकाल तक एकान्तवास किया
करते थे ।
महामंत्र सत्यराम द्वारा अनंत प्राणीमात्र व भूत प्रेतों का उद्धार श्री दादूजी
महाराज ने किया । सत्यराम महामंत्र इसलिए है कि यह सभी मंत्रों का सार
है, तात्विक ज्ञानरुप चारों वेदों ( ऋग्वेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद, सामवेद ) के
रहस्यों सदैव अकीलित है, अक्षुण्ण है, प्रज्वलित एवं नित्य चैतन्य रहनेवाला
है । इसमें “राम नाम सत्य है” का रहस्य भी अंतर्निहित है । श्री दादूजी
महाराज हठयोग, नाड़ीयोग, सामान्य योग तथा साधन योग इन सब तंत्रों में
पारंगत थे और इनके रहस्य को वे सरल सुबोध भाषा में जनता के समक्ष
प्रस्तुत भी करते थे । वे जानते थे कि सारे वायुमंडल सहित समस्त प्राणी
एक ऐसे अनोखे तंत्र में बंधे हुए हैं जिसमें प्रत्येक कामना की सिद्धि तथा
सम्पूर्ति के लिए लाखों मंत्र तंत्र रचे हुए हैं । सभी मंत्रों का रहस्य अनावृत
करने वाले श्री दादूदयालजी महाराज ने सर्वसाधारण को “सत्यराम” का
ऐसा महामंत्र दिया जिसका महत्व अनिर्वचनीय है और जो निरन्तर
दैदिप्यमान रहता है ।
संत शिरोमणि श्री दादूदयालजी महाराज आनंद की वर्षा करते हुए नारायणा
पहुँचे । वहां तत्कालीन राजा नारायणदासजी के विशेष आग्रह पर श्री
महाराजजी रघुनाथजी के मंदिर में ठहर गए, जहां तीन दिन तक सत्संग का
दुर्लभ लाभ राजा तथा प्रजाजनों को प्राप्त हुआ । बाद में श्री महाराजजी ने
सात दिन तक त्रिपोलिया के ऊपर एकांत वास किया । आठवें दिन श्री
महाराजजी के आसन के निकट एक नाग प्रकट हुआ और फण के द्वारा उन्हें
अपने पीछे चलने का संकेत दिया । श्री दादूजी महाराज इसे भगवदाज्ञा
समझ कर नाग के पीछे चल पड़े । नाग जल से परिपूर्ण तालाब के ऊपर
चला एवं महाराज श्री भी उसके पीछे पधारे । तालाब से होकर नाग एक

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