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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 600, कुल 793 में से

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पृष्ठ 600

उनके पास दंडवत होने के लिए ये तैयार रहेंगे। यह भी कहेंगे कि हम तो पहले से
ही बादशाह के सेवक रहे हैं। कोई और रास्ता न होने के कारण साले के पास रुके
थे। वफादारी का सबूत पेश करने के लिए ये बैल उपयोगी सिद्ध होंगे।"
आठ
सवेरे सवेरे जुल्फिकार आकर बादशाह के सामने खड़ा हो गया तो बादशाह ने
उसके चेहरे की ओर देखा। औरंगजेब का कलेजा काँप गया था। उसके मौसेरे भाई
का चेहरा इतना ठगा सा हो गया था कि आगे कुछ पूछने की बादशाह की हिम्मत
ही नहीं हो रही थी।
करुण एवं उदास स्वर में जुल्फिकार किसी प्रकार बोला, "रहम करें
जहाँपनाह! यह बुरी खबर देने के लिए मेरी जबान उठ ही नहीं रही है। हमारे
जैनुद्दीन और उसके साथियों ने बड़ी कोशिश की थी। पाचाड़ के राजमन्दिर में
राजाराम ने उन्हें खाने पर बुलाया था। उसी रात को उसे गिरफ्तार करना था। किन्तु
उसी समय सम्भाजी की पत्नी येसूबाई वहाँ पहुँच गयी। उसने हमारे बहादुरों की
आँखों में नाचती चोर दृष्टि को तत्काल पहचान लिया। 'दुश्मन, दुश्मन' कहकर
ऐसा शोर मचाया कि मराठे सैनिक दौड़ पड़े। फिर क्या था, मराठों ने हमारे सारे
साथियों को काट डाला। बचे हुए दो को कैद कर लिया गया है।"
बादशाह ने कुछ भी कहा नहीं। खिन्न मन से लालबारी के दरबार वाले डेरे
में जाकर बैठ गया। चुपचाप नित्य की भाँति अपना कार्य शुरू किया।
उसी दिन दोपहर को मंसूरखान की एक हजार सवारों की एक फौज, दौड़ते
हुए जत के मैदान में आयी। सेना अपने साथ कुछ कैदियों को भी लेकर आयी थी।
औरंगजेब ने तुरन्त उन्हें भीतर बुलाया। बादशाह के सामने गोसांई की वेश भूषा में
आठ हट्टे कट्टे नौजवान आँखें लाल किये निर्भीक भाव से खड़े थे। उनके काले
कठोर चेहरे और उनकी लाल आँखों को देखने का साहस नहीं हो रहा था।
"मंसूरखान! कौन हैं ये लोग?"
"जहाँपनाह! कल ही हिन्दुओं के एक शिवमन्दिर में मिल गये। ये बदमाश
सम्भा के आदमी हैं।"
"आठ?"
"नहीं हजरत! चार पाँच और भी थे। हमारे सूबेदार ने रात को धावा बोला तो
५७४ सम्भाजी