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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 581, कुल 793 में से

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पृष्ठ 581

चार
पिछले आठ वर्षों के जैसे भयंकर दिन महाराज और महारानी ने देखे नहीं थे। आने
वाला प्रत्येक दिन अशुभ का सूचक बन रहा था। अब्दुल्लाखान ने सरमगढ़ के
किलेदार को लालच देकर किले को मुगलों के क़ब्जे में ले लिया था। किन्तु शम्भू
महाराज ने तत्काल फौज भेजकर उस पर पुनः क़ब्ज़ा कर लिया। किन्तु इस युद्ध में
लगभग डेढ़ सौ मराठा वीरों को जान गँवानी पड़ी। धन जन की हानि हुई। नासिक
और बागलाण के क्षेत्र में एक के बाद एक किला मुगलों के अधिकार में जा रहा था।
यह संकट निरन्तर बढ़ता हुआ रायगढ़ की ओर आ रहा था। एक ओर राज्य का
खजाना खाली होता जा रहा था, दूसरी ओर शत्रु की अपेक्षा भीतर के गद्दार घातक
सिद्ध हो रहे थे।
नरभक्षक पक्षियों की तरह रोज संकट अपना आहार ग्रहण कर रहे थे। शम्भू
महाराज बिस्तर पर लेटते थे तब भी उनका शरीर वेदनाग्रस्त रहता था। नींद उड़
गयी थी। दरवाजे पर किसी की पदचाप सुनाई दी। येसूबाई बाहर निकल आयीं।
द्वारपाल दो हरकारों को लेकर आया था। महारानी ने समझ लिया कि समाचार
आपात कालिक ही होगा। हरकारे शृंगारपुर-प्रभावली क्षेत्र आये थे। येसूबाई ने
समाचार वाली थैली खोली। पत्र को पढ़ा। उनकी साँस घुटने लगी। इन दिनों
दरवाजों के पर्दे हिले नहीं कि शम्भू महाराज अचकचाकर उठ जाते थे।
"येसू, क्या है वह?" अपनी बगल में खड़े शम्भू महाराज की आवाज
सुनकर येसूबाई चकित हो गयीं। महाराज कब आकर बगल में खड़े हो गये, उन्हें
पता ही नहीं चला। उन्होंने गम्भीर स्वर में कहा, "महाराज एक भयंकर समाचार
आया है।"
"कौन-सा?"
"जितना सोचा गया था उससे कहीं भयंकर है। शेख मुकर्रबखान और
गणोजी भाईसाहब का पन्हाला के पास एक समझौता हुआ है। उसके अनुसार
संगमेश्वर और शृंगारपुर के आसपास का महत्त्वपूर्ण क्षेत्र गणोजी मुगलों को देंगे।
इसके साथ ही घोड़ों से भरे हुए अपने दो-तीन तबेले भी मुगलों को देंगे। वह दुष्ट
खान वहाँ पर हमारे राज्य में दो फौजी चौकियाँ बनाने वाला है।"
"कहाँ, कहाँ?"
"इधर शृंगारपुर के पास मैदान में और कौंडभैरव तथा मालेश्वर की ओर
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