छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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सवेरे ही बादशाह ने सर्जाखान को बुला लिया। अपनी थकी आवाज में बादशाह ने
कहा, "सर्जा हमने बीजापुर की कठिन तटबन्दी तोड़ दी। गोलकुंडा को ध्वस्त कर
वहीं की खन्दक में डाल दिया। किन्तु यदि सच कहूँ तो यह कोई बहादुरी का काम
नहीं है। एक ही पीड़ा मेरे कलेजे को आज भी जला रही है।"
"सम्भाऽऽ!"
"बिल्कुल ठीक सर्जाखान बेटे। बुरहानपुर में पाँव रखने से पहले ही हम
तुम्हें अपनी सेवा में बुला रहे थे। कोई बात नहीं तुम हमारे पास देर से आये हो,
किन्तु दुरुस्त आये हो। हम तुमसे खुश हैं। नहीं तो सर्जाखान आजकल खुशी की
कोई बात होती कहाँ है?"
"जी बादशाह सलामत!"
"तू बीजापुर वालों का सेनापति था। बीजापुर की एक बात की याद है
तुमको?"
"कौन सी जहाँपनाह ?"
"वहाँ के बुर्ज के नीचे बारूद की सुरंग लगाने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे थे।
किन्तु वहाँ की पथरीली जमीन में हमारे कुदाल फावड़े काम नहीं आ रहे थे।
उनकी धारें टूट जाती थीं। तब हमने बगल के गाँव से एक देहाती लोहार को
बुलाया। तब उस बुड्ढे लोहार ने हँसते हुए हमें उपदेश दिया, "हुज़ूर, जहाँ का
पत्थर तोड़ना हो वहीं की भाथी के बने हथियार का उपयोग करना चाहिए। क्या
कुछ समझ में आया?"
"हजरत- ?"
"उस काफिर सम्भा को समाप्त करने की शक्ति हमारे तीन शहजादों, बाइस
पोतों और तीस सरदारों में से किसी में भी नहीं है। उस शैतान का खात्मा तुम्हारे
जैसा कोई दक्खिनी बहादुर ही कर सकता है।" बादशाह थोड़ा रुका फिर लम्बी
साँस लेकर बोला, "जाओ जल्दी से जल्दी निकलो। जितनी भी फौज और रसद
लेना चाहो, ले लो यदि सम्भा की गर्दन काटकर ले आया तो तू नसीब का सिकन्दर
बन जाएगा। दक्खिन से बाजे गाजे के साथ तुम्हारा जुलूस हम उत्तर ले जाएँगे।
लालकिले में राजसी वस्त्र पहनाकर हम तुम्हारा सम्मान करेंगे।"
"जहाँपनाह मैं जरूर कोशिश-"
सम्भाजी :: 559