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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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पृष्ठ 54

केवल बँटवारे का आग्रह करिए और निर्णय महराज पर ही छोड़ दीजिए कि वे
बँटवारा चाहते हैं या शम्भूराजा को साथ लेकर युद्ध पर जाना। मेरी मानो तो
शम्भूराजा का महाराजा के साथ जाना हमारे विनाश का कारण होगा। पहले से ही
पिता-पुत्र का अच्छा मेल हो गया है। राज्याभिषेक के लिए काशी से गागा भट्ट
आये थे। उस समय उनके साथ शिवपुत्र दिन रात संस्कृत काव्य पर चर्चा करते थे।
युवराज ने उन्हें अभिभूत कर लिया था। आप जानती हैं क्या कि काशी के उस
महन्त ने शिवाजी महाराज से क्या कहा था।"
"क्या ?"
"उन्होंने कहा था कि 'यह सवाई शिवाजी बनेगा।' मेरी मानो तो युवराज को
कर्नाटक युद्ध में जाने से रोको। नहीं तो चतुर युवराज शम्भूराजा अपने लिए वसीयत
लिखवा ले आएँगे और आपके राजाराम के लिए रायगढ़ घास फूस की झोपड़ी के
बाहरी कोने में भी जगह नहीं मिलेगी।"
तीन
रानी सोयराबाई बड़ी तेजी से महाराज के महल की ओर चली जा रही थीं।
आजकल उनको किसी 'अज्ञात भय ने घेर रखा था। बिस्तर पर विश्राम कर रहे
शिवाजी महाराज के पास जाकर सोयराबाई बैठ गयीं। इन दिनों वे बहुत सावधान
रहने लगी थीं। भविष्य की चिन्ता सोयराबाई को उद्वेलित कर रही थी। समय ने ही
उन्हें अपने और पराये का भेद करना सिखाया था। सोयराबाई अनेक मधुर कल्पनाएँ
करती थीं। राजमहल में ठुमक ठुमक कर दौड़ने वाला उनका बेटा राजाराम अपने
पिता के सिंहासन पर बैठना चाहिए। उसके पीछे आज के स्वराज्य सेनापति बन्धु
हम्बीर राव मोहिते खड़े रहेंगे। माता भवानी के बहुत बहुत आशीर्वाद मिलेंगे। इन्हीं
दिनों बड़े महाराज के साथ राज्य के कार्यव्यापार में शम्भूराजा की ख्याति और
लोकप्रियता निरन्तर बढ़ती जा रही थी। गागा भट्ट ही नहीं, रायगढ़ पर आने वाले
फ्रांसीसियों और पुर्तगालियों के वकील भी शम्भूराजा की प्रखर बुद्धि और
कर्तव्यपरायणता की प्रशंसा करते थे। यही कारण था या कुछ और किन्तु आज कल
जब भी शम्भूराजा सामने पड़ते थे, सोयराबाई के गोरे चिट्टे भाल की छोटी नस तन
जाती थी। रंग में भंग डालने वाले शम्भूराजा उन्हें बिन बुलाये मेहमान जैसे पराये
और ठग प्रतीत होते थे। महाराज के साथ थोड़ी इधर उधर की बात करने के बाद
52 :: सम्भाजी