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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 518, कुल 793 में से

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पृष्ठ 518

मुँह खोलने की हिम्मत न कर सके। उसी प्रवाह में महाराज ने वह भी कह दिया,
“मेरी दृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति को अपने-अपने धर्म के अनुसार आचरण करने का
अधिकार है।"
"महाराज ! वह तो प्रत्येक के लिए होता ही है।" कैप्टेन गॅरी बोला।
"गॅरी साहब, सच्चाई कुछ अलग है। आपके पादरी लोग हिन्दुओं को
जबरदस्ती ईसाई बनाते हैं। इसी उद्देश्य से मुम्बई और अन्य बाजारों में मनुष्यों की
बिक्री होती है। यह अमानवीय व्यवहार भी बन्द होना चाहिए।"
कैप्टेन गॅरी ने यह भी स्वीकार किया। इस प्रकार अंग्रेजों और मराठों के
सन्धिपत्र के सातवें क्रमांक पर स्पष्ट शब्दों में लिखा गया—'हमारे राज्य में किसी
भी मनुष्य को गुलाम या ईसाई बनाने के लिए अंग्रेजों के द्वारा खरीदा नहीं जाएगा।'
सन्धिपत्र पर मुहर लगा दी गयी। उपहारों का लेन देन हुआ। मुम्बई के
अंग्रेजों की मंडली प्रसन्नतापूर्वक वीरवाड़ी से बाहर निकली। महाराज का
अभिवादन करते हुए प्रह्लाद निराजी ने चिन्तित स्वर में कहा, "महाराज, आपकी
इच्छानुसार यदि मुम्बई मिल गयी होती...।"
"मुम्बई हमें अवश्य मिलेगी, पन्त ! औरंगजेब के साथ जीवन-मरण की इस
लड़ाई से हमें मुक्त होने दीजिए। एक ओर औरंगजेब की कब्र तैयार होगी और
दूसरी ओर मुम्बई पर क़ब्ज़ा होगा।"
शम्भूमहाराज की आँखों में एक नयी चमक दिखाई पड़ी। हाथ की मुट्ठियाँ
बाँधते हुए उन्होंने कहा, "मुम्बई हमारी ही भूमि का हिस्सा है! प्राकृतिक रूप से
हमीं उसके स्वामी हैं। विश्व व्यापार की चाभी हमारे हाथ में होनी चाहिए इसके
लिए अंग्रेजों को हम मुँहमाँगा मूल्य देने को तैयार हैं। किन्तु यदि इस तरीके से वे देने
को तैयार न होंगे तो हमारी तलवार किस दिन के लिए है?"
तीन
शम्भूमहाराज को यह प्रातःकाल बहुत सौभाग्यसूचक लग रहा था। वे बड़े गर्व से
अर्जोजी यादव की ओर देख रहे थे। अर्जोजी ने स्वराज्य में अनेक इमारतों का
निर्माण कर यश कमाया था। किन्तु आज का उनका साहस उनके यश का शीर्ष बिन्दु
बन गया था। हंबीरराव ने अहमदनगर के क़िले की तटबन्दी तोड़कर प्रवेश करने का
516 . सम्भाजी