छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 51, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंउनके पूर्व चरित्र का स्मरण करके वे उस ओर अधिक ध्यान नहीं देते थे। किन्तु
शम्भूराजा के उफनते हुए गर्म खून को ये बातें सह्य न थीं। उन्होंने अनेक लोगों की
चोरी पकड़ी थी। जवानी के जोश में वे अनेक बार अण्णाजी की उम्र का ध्यान नहीं
रख पाते थे। और भरी सभा में बोल देते थे—"देखो आ गये मुफ्त का खाने वाले।
ये आ गये धन का अपहरण करने वाले।'' युवराज के इस प्रकार के स्पष्ट उद्गार को
सुनकर अण्णाजी जैसे अनुभवी लोगों के हृदय को ठेस लगती थी।
संभाजी अठारह उन्नीस वर्ष के हो गये थे। वे दिनोंदिन शक्तिशाली बनते
जा रहे थे। उनके और सुरनबीस अण्णाजी के बीच एक दरार बढ़ती जा रही थी।
हंसा की घटना के बाद से तो युवराज अण्णाजी को कई जन्मों के शत्रु से भी अधिक
दुष्ट लगते थे। अण्णाजी को आया देखकर सोयराबाई आनंदित हो गयीं। दोनों की
राह का काँटा एक ही था। इसी कारण सोयराबाई ने अपने मन की बात अण्णाजी से
कह दी। "अण्णाजी पन्त हमारे बेटे राजाराम यदि शम्भूराजा से उम्र में बड़े होते तो
कितना अच्छा होता?''
राजगद्दी के लिए उम्र का ख्याल अनेक बार नहीं किया जाता, महारानी! गर्भ
में स्थित राजमाता के पुत्र को आदर के कारण राजगद्दी का अधिकारी बनाया जाता है।
ऐसे कितने उदाहरण मैं आपको दूँ? हमारे राजाराम साहेब तो छः सात मास के हो
गये हैं।'' राजाराम के राज्याभिषेक की कल्पनामात्र से ही अण्णाजी दत्तो प्रसन्न हो
गये।
सोयराबाई थोड़ी देर तक चुप बैठी रहीं। फिर कुछ स्मरण करके बोलीं,
"एक बात तो अच्छी हुई। बिना सोंठ के ही कुछ समय के लिए खाँसी चली गयी।
शिवपुत्र कर्नाटक की लड़ाई में जा रहे हैं न? उनकी अनुपस्थिति में रायगढ़ के लोग
कुछ महीने बिना किसी बाधा के बिताएँगे।''
"नहीं, नहीं महारानी जी! आप यह क्या कह रही हैं?'' अण्णाजी
कड़वाहट भरे स्वर में बोले, "कैसे भयंकर सपने आप देख रही हैं इसकी कल्पना
क्या है आपको? इस लड़ाई में स्वयं को महाराज की दृष्टि में महापराक्रमी सिद्ध
करने का अवसर शम्भूराजा बिल्कुल नहीं छोड़ेंगे। उनके मुकुट में यह अतिरिक्त
सम्मान चिह्न होगा। हिन्दवी स्वराज्य के योग्य उत्तराधिकारी बनकर वही घूमेंगे।"
सोयराबाई ने माथे का पसीना अपने पल्लू से पोंछ लिया। लम्बी गहरी साँस
लेकर बोलीं, "पन्त! वायु की दिशा कुछ अच्छी नहीं है।"
"परन्तु इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आप या हम?'' सोयराबाई चुप रहीं।
उनके मन में द्वन्द्व चल रहा था। हंसा प्रसंग की जाँच का दायित्व मुझे क्यों दिया
गया! शिवाजी महाराज के करोड़ों मुहरों के ज्येष्ठपुत्र, आम जनता की आशा के
केन्द्र, हिन्दवी स्वराज्य के उत्तराधिकारी शम्भूराजा पर अत्यन्त हीन कोटि का कार्य
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