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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 496, कुल 793 में से

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पृष्ठ 496

में मराठों के दस बारह हजार की सेना हमेशा तैयार खड़ी रहती है। इस सेना पर
राजधानी की रक्षा की जिम्मेदारी है। इसलिए वे कभी भी अपनी जगह से हटते नहीं
हैं।'"
"‘लेकिन शहाबुद्दीन तो कहता है—पाचाड़ जला दिया, वाड़ी को खाक कर
दिया।’"
"‘पाचाड़ की सीमा में दूर के जंगलों में बनाये गये जानवरों के कुछ तबेलों
को उन्होंने लूटा, जलाया। उनकी फौज निजामपुर से गांगोली और पाचाड़ की सीमा
तक स्वतन्त्रता से विचरण कर रही है, यह बात सच है। लेकिन अगर सम्भाजी की
बात करें तो वे अभी तो गोवा की ओर ही हैं।’"
इन बातों को सुनकर बादशाह को आश्चर्य हुआ। उसने क्रुद्ध होकर कहा,
"‘यह शहाबुद्दीन इतना पागल निकला ? और काफिर मरगट्ठों ने उसे इतने दिन
जीवित कैसे रहने दिया ?’"
"‘जहाँपनाह ! कोलाड गाँव के ऊपरी हिस्से में देवघाट पर पहरा देने वाली
मराठों की सेना को खानसाहब ने तलवार के घाट उतार दिया, निजामपुर को भी
भस्म कर दिया। यह सारी बातें सच हैं। किन्तु निजामपुर के पास ही ताम्हिणी नाम
का बड़ा घाट है। वहाँ घनी झाड़ियाँ, गहरी नदियाँ और भयानक घाटियाँ हैं। इसी
ताम्हिणी के पीछे खानसाहब ने अपना डेरा डाल रखा है। उनकी फौज दिन में
निजामपुर का फेरा लगाकर रात में ताम्हिणी में आकर छुप जाती है। इतनी ही सच्चाई
है। रायगढ़ और मराठों का शेष भाग पूरी तरह स्वतन्त्र है।’"
"‘बेवकूफ, कमीना कहीं का।।’" शहाबुद्दीन के बड़बोलेपन पर बादशाह को
बहुत क्रोध आया। उसने गुर्राकर कहा, "‘उस कमबख्त का आज ही तबादला कर
देता हूँ। युद्धभूमि से उसे वापस बुलाता हूँ।’"
"‘नहीं मालिक ऐसी भूल न करें।’" अबूमुहम्मद कहने लगा, "‘जहाँपनाह,
शिवाजी और सम्भा के इस इलाके में गढ़ और किले बहुत मजबूत हैं लेकिन वहाँ
के सभी लोग बहादुर और ईमानदार नहीं हैं। ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने छोटे से
स्वार्थ के लिए अपना देश भी बेचने के लिए तैयार हैं ऐसे गद्दार भी बहुत हैं।’"
"‘बेटे कहना क्या चाहते हो ?’" बादशाह ने शान्त स्वर में पूछा।
शहाबुद्दीन साहब ने चाकड़ से लेकर पूना तक के सभी सरदारों और
जमींदारों को अपने पास बुलाया है। वे उन्हें धन एवं अन्य अनेक प्रकार का लालच
देकर अपनी ओर मिलाने का प्रयास कर रहे हैं। वे बड़े-बड़े मरगट्ठों को अपने
जाल में फँसाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे आका, एक बार ये खानदानी गद्दार
जहाँपनाह के हाथ में आ जाएँ तो किलों को मिटाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।’"
"‘बस ! बस ! क्या तो तुम्हारा दिमाग और क्या ही गहरी सोच।’" बादशाह ने
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