छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजीवन बिता रही दुर्गा देवी और रानू दीदी की मूर्ति उनकी आँखों के सामने नाचने
लगी। साथ ही पैरों में घुँघरू बाँधे छोटी-सी गुड़िया भी आँखों के सामने नाचने
लगी।
उसी प्रवाह में शम्भूमहाराज कहने लगे, "आज भी हमें अनुभव नहीं होता
कि चिटणीस काका हमारे बीच नहीं हैं। खंडोबा, कोंडाजी के बलिदान के बाद का
एक प्रसंग आपको बताता हूँ। जंजीरा के सामने वाली खाड़ी के किनारे हम
प्रातःकाल घूम रहे थे। उस सुबह वहाँ एकदम सुनसान था। उसी समय एक मध्यम
कद, पैंसठ वर्ष का, एक सुन्दर तेजस्वी व्यक्ति दिखाई पड़ा। एकदम चिटणीस
काका जैसा। हम उन्हें पुकारते हुए, पानी की लहरों से भींगती हुई काली चट्टान
पर बैठ गये। फिर वहाँ कोई नहीं दिखाई पड़ा। एक ओर समुद्र की लहरों का शोर
और दूसरी ओर राजापुर का पड़ाव। कहाँ चला गया होगा वह व्यक्ति? समुद्र में या
पहाड़ियों में?"
"वह कभी-कभी केवल आभास होता है।"
"नहीं खंडोजी, इन आभासों में भी सत्य का बड़ा अंश छुपा होता है। हमें
लगता है कि बालाजी काका का बचपन जंजीरा के किले में ही बीता। कहीं यह
छायामूर्ति यह तो नहीं कह रही है कि यदि मैं होता तो अवश्य ही मदद करता।"
बहुत समय से बातें चल रहीं थी। सवेरे जल्दी उठकर जाना था। तम्बू के
मुख्य द्वार पर ईमानदार रायप्पा बैठा हुआ था। उसने कुछ बेचैन होते हुए पूछा-
"राजाजी कब तक जागते रहोगे? कुछ विश्राम भी कर लीजिये।" वह साहस
बटोरकर बोला।
खंडोजी को आदेश देते हुए महाराज ने कहा, "खंडोजी कब निकल रहे हैं
रायगढ़ की ओर?"
खंडो बल्लाल ने हाथ जोड़कर कहा, "महाराज आपके साथ जंजीरा का
मुकाबला करना बाबाजी के नसीब में नहीं था। कम से कम मुझे तो गोवा के
आक्रमण के लिए अपने साथ आने दें।"
तीन
अब अधिक समय नष्ट करने से क्या लाभ, राजन? यह वाइसराय केवल चालाक
और धूर्त ही नहीं, बहुत बड़ा कपटी और गद्दार भी है अब रुकिए नहीं। किसी भी
462 :: सम्भाजी