छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 428, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंसे ही इस्ताम्बूल, पेरिस, लंदन से लेकर अफ्रीका, जावां. सुमात्रा तक का व्यापार
चलता है। इस सोने की लंका को अधिक दिन के लिए औरंगजेब के अधिकार में
छोड़ना, उसकी शक्ति को बढ़ावा देना है।"
"राजन, एक और मुद्दा भी बड़े महत्त्व का है।"
"कौन-सा?"
"औरंगजेब के सरदारों का यहाँ पैर जमाकर बैठ जाना अनुचित और
धोखादायक होगा। मराठों का कोंकण से नासिक और बाग़लान की ओर जाने का
रास्ता दुश्मनों के क़ब्ज़े में आ जाएगा। एक बार रसद पहुँचाना बन्द हुआ कि
खानदेश के अपने बीस-पचीस किले अपने आप पके जामुन की तरह हमेशा के
लिए औरंगजेब के मुँह में चले जाएँगे।
शम्भूराजा ने गर्दन हिलाकर हामी भरी। पहाड़ी से उतरते-उतरते सूबेदार
बिट्ठलराव ने राजा और कविराज को जानकारी दी—"महाराज, अभी हाल में समुद्री
क्षेत्र में अरबों के जंगेखान और अँग्रेजो के नौसैनिकों में बड़ी अनबन हुई।"
"कैसी अनबन सूबेदार?"
"अँग्रेजों के प्रेसिडेंट नामक जहाज पर आक्रमण करने के लिए जंगेखान ने
अपनी पाँच जहाजें भेजी थीं। उस जहाज को जला देने की अरबों ने पूरी
कोशिश की।"
"आगे?"
"जहाज बहुत बड़ा था। उसका नुकसान भी बहुत हुआ। किन्तु वह डूबा
नहीं। इससे मुम्बई के सारे अँग्रेज विचलित हो गये हैं।"
"अरब लोग छूट गये?" राजा ने जानना चाहा।
"नहीं, नहीं, जंगेखान के तीन जहाज जला दिये गये। आखिर में वे पीछे
हटे। कुछ भी हो निलोपन्त पेशवा से पता चला है कि जंगेखान ने अँग्रेजों को अच्छा
सबक सिखाया।"
शम्भूराजा और कविराज एक दूसरे की ओर देखकर सन्तोष व्यक्त करते हुए
हँसे। शम्भूराजा की दृष्टि नीचे तलहटी की ओर गयी। वहीं पर खाड़ी में घुसी हुई
पहाड़ी की सूँड़ पर बसा हुआ पारसिक गाँव था।
शम्भूराजा ने हाल ही में वहाँ एक किला बनाना आरम्भ किया था। पास
खुदाई का काम चल रहा था। वहाँ सैकड़ों की संख्या में कमाठी मजदूर और
कारीगर काम कर रहे थे। हाथियों की पीठ पर और ऊँटगाड़ी में लादकर पत्थर
इकट्ठे किये जा रहे थे। इन्हीं पत्थरों से पानी के तट पर बड़े-बड़े बुर्जों का निर्माण हो
रहा था।
426 :: सम्भाजी