सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 419, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 419

स्वराज्य बहुत छोटा है। हमारी साधन-सामग्री सीमित है। बड़े महाराज के समय से
आज तक हमारी सेना कभी भी सत्तर-पचहत्तर हजार से आगे नहीं गयी। औरंगजेब
की सैनिक शक्ति हमसे सात-आठ गुना अधिक है। द्रव्य, साधन सामग्री और
हाथी-घोड़ों की संख्या तो बहुत अधिक है। "
दुर्गादास ने गर्दन नीचे झुका ली। तब शम्भुराजा ने कहा-
"इस तरह नाराज न हों दुर्गादास। एक बार इस महासंग्राम में फँसे हमारे पैर
एक बार बाहर निकल जायें तो आपकी ओर ध्यान देना हमारे लिए सम्भव होगा।"
दुर्गादास ने उत्तर के हिन्दू राजाओं, जमींदारों, कुछ मुसलमान और राजपूत
सरदारों की सूची पढ़कर सुनाई। इस पर कवि कलश, दुर्गादास और शम्भुराजा में
वाद-विवाद हुआ। बीच में ही शम्भुराजा ने कहा-
"हमारा पुर्तगालियों से अघोषित युद्ध चल रहा है। यदि आवश्यक हुआ तो
आपको और शहजादे को गुजरात के रास्ते बाहर निकलना पड़ेगा आप तैयारी रखें।"
"हम उत्तर की ओर जाने के लिए कब से व्यग्र हैं।" दुर्गादास ने कहा।
"आज की बैठक में शहजादे नहीं पहुँच पाये?" राजा ने पूछा।
"महल में आराम कर रहे हैं।" दुर्गादास ने कहा।
"महाराज, शहजादे ने आपके लिए सन्देशा भेजा है। उनका कहना है कि
उन्हें विचार विमर्श की जगह प्रत्यक्ष कार्य करना पसन्द है। अपने घोड़े तैयार रखें,
हम उन्हें दिल्ली ले जाएँगे।"
इस सन्देश को सुनकर शम्भुराजा और उनके बाद दुर्गादास भी हँसे।
शम्भुराजा ने कहा, "यदि ये शहजादे सचमुच बातों से अधिक कार्य में विश्वास
रखने तो कितना अच्छा होता?" कहते-कहते शम्भुराजा मौन हो गये। उन्होंने
स्पष्ट किया- "मरे हुए हाथी के चमड़े की भी कीमत होती है। जो भी हो आखिर
ये हैं तो शहजादे ही न। यदि हम इन्हें दिल्ली की गद्दी पर बिठाने में सफल हो
जायें तो उत्तर के सारे अमलदार शहजादे के प्रेम कारण नहीं औरंगजेब के डर से,
कठोर दंड के भय से अकबर के पीछे खड़े हो जाएँगे, विद्रोह करेंगे।"
"शम्भू महाराजा, कुछ कीजिए। राजपूताना से हमें अनेक सन्देश आ रहे हैं।
औरंगजेब के दानवी जजिया समझौते के कारण मुसलमानों को छोड़कर शेष सभी
धर्मों और जातियों के लोग परेशान हैं। बादशाह के विरुद्ध खड़ा होने वाला कोई
मसीहा प्रजा को चाहिए।"
"दुर्गादास जी, अम्बर के उस राजा राम सिंह जैसे लोग इस अत्याचार के
विरोध में आगे क्यों नहीं आते?"
दुर्गादास के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था। वे उठकर वकीली महल
सम्भाजी 41-