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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 402, कुल 793 में से

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पृष्ठ 402

पुनः पूछा— "फिर वह बगल में क्या है? देखूँ तो जरा।"
"रुकिए मालिक, मैं ही दिखाता हूँ कि क्या है।"
कृष्णाजी पन्त ने बगल में दबाया अपना जरीदार लाल अंगरखा बाहर निकाला
और गीले वस्त्र की तरह झटककर उसे फैला दिया। वह अंगरखा अनेक जगहों पर
फाड़ दिया गया था। यह देखकर सभी को पता चल गया कि मराठों के वकील का
मैसूर में कैसा स्वागत किया गया था। उस अपमानित चीथड़े को देखते नहीं बन रहा
था। दाँत पीसते हुए धीमी आवाज में शम्भूराजा ने पूछा—
"मैसूर के उस घमंडी राजा ने कहा क्या?"
"कैसे बताऊँ महाराज ? फिर भी बताता हूँ।"
'मैं अनुमति लेकर चिक्कदेवराजा से मिला। उन्हें बताया सम्भाजी महाराज
के यहाँ से आया हूँ।' वह तुरन्त बोल पड़ा—'कौन राजा ? कहाँ का राजा ? हम ऐसे
किसी भी आदमी को नहीं जानते। जिस तरह घास उगती है उसी तरह हजारों
जमींदार हर रोज पैदा होते हैं और घास की तरह सूखकर समाप्त हो जाते हैं।' मैसूर
दरबार के विदूषकों ने किस प्रकार वस्त्र फाड़े और अपमानित किया था, वह सब
कृष्णाजी को स्मरण हो आया। वे रो पड़े।
महारानी येसूबाई, कवि कलश और अन्य सभी भयभीत होकर शम्भूराजा की
ओर देखने लगे। सभी का अनुमान था कि अब जलते हुए बारूदखाने की तरह
शम्भूराजा के विराट रूप का दर्शन होगा। किन्तु शम्भूराजा क्रुद्ध न होकर गम्भीर बने
रहे। अपने शयकक्ष की ओर जाते समय उन्होंने साथियों से कहा, "अब क्यों चिन्ता
करें? हमारी दिशा निश्चित हो गयी है। कर्नाटक और तमिल प्रदेश में नचाये बिना
हमारे घोड़ों के दाँत को पीड़ा शान्त नहीं होगी।"
"क्या मतलब महाराज ?" सभी ने भयातुर होकर पूछा।
यह स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा था कि महाराज स्वयं कर्नाटक तमिल की
यात्रा पर निकलेंगे। इस समय पाँच लाख की सेना के साथ छाती पर सवार औरंगजेब
का भी सभी को भय था। अपने भयभीत साथियों की ओर राजा ने देखा। येसूबाई
की गोद में सोये बालक शाहू को उन्होंने सीने से लगा लिया। उन्होंने कहा, "राज्य
का कार्यभार और राज्य का संरक्षण हम महारानी और हंबीरराव पर सौंपेंगे। तीन-
चार महीने की दक्षिण यात्रा किये बिना अब कोई अन्य मार्ग नहीं है।"
"किन्तु महाराज औरंगजेब ?"
"उसकी कुंडली का हमने ठीक-ठीक अध्ययन कर लिया है।" शम्भूराजा
ने सीने से लगाये बालक शाहू के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए आत्मविश्वासपूर्वक
कहा, "अब मृग नक्षत्र से वर्षा आरम्भ हो गयी है। दशहरे तक कोंकण के कीचड़
में अपना घोड़ा लाने का साहस औरंगजेब नहीं करेगा। इसी कालावधि में हम चले
400 :: सम्भाजी