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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 793 में से

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पृष्ठ 35

"नहीं, नहीं! चाहें तो अपने लेख को लपेट लीजिए। किन्तु इस प्रकार
अनधिकारी व्यक्ति से ऐसा अपमान नहीं होना चाहिए।" गहुर्जी सोमनाथ ने स्पष्ट
शब्दों में कह दिया।
चार
सन्ध्या समय की शीतल वायु मन्द मन्द बह रही थी। शम्भुराजा के महल के पीछे
एक छोटा सा बगीचा था। संभाजी और येसूबाई की गृहस्थी के साथ वह भी
फलता फूलता गया। बगीचे में ही एक पुराना गूलर का पेड था और बेंत का वन
था। उस वृक्ष की एक मोटी टहनी पर पीतल की जंजीरों से बना झूला पड़ा था।
उसी झूले पर युवराज और युवराज्ञी बैठे कुछ बातें कर रहे थे। सामने हिरनों के बच्चे
खेल रहे थे। बीच बीच में गूलर के फल नीचे टपक जाते थे।
युवराज और युवराज्ञी को इस प्रकार की शान्ति बहुत दिनों बाद मिली थी।
येसूबाई ने युवराज को टटोलते हुए गम्भीरता से कहा "राजा को सभी प्रकार के
अधिकार होते हैं। राजा की इच्छा ही अन्तिम आदेश बन जाती है। अपने राज्य की
प्रत्येक उत्तम और सुन्दर वस्तु पर उसी का अधिकार होता है। इसीलिए राजा, यदि
राज्य की यदि कोई सुन्दर युवती मन को भा गयी तो गाय बैल की तरह कभी
भी उसे भगाकर अपने जनानखाने में कैद करके रखने का जुर्म भी करता है। ऐसा
नहीं है क्या?"
"येसू! आप यह क्या कह रही हैं? ऐसे निर्लज्ज अत्याचार केवल यवनों
और सुल्तानों के ही राज्य में होते हैं। शिवाजी महाराज के स्वराज्य में नहीं।"
"युवराज! सच बोल रहे हैं आप?" हँसते हँसते येसूबाई की पुतलियाँ
कठोर हो गयीं—"तो फिर युवराज! महाराज के पुत्र संभाजी राजा द्वारा ऐसा
अत्याचार क्यों किया गया?"
"कौन सा अत्याचार?"
"अण्णाजी दत्तो प्रभुणीकर तो शिवाजी महाराज के एक आधारस्तम्भ हैं।
उनकी लाड़ली बेटी हंसा पर अत्याचार करके आपने कौन सी बहादुरी दिखायी?'
संभाजी राजा जैसा शीघ्र क्रुद्ध हो जाने वाला व्यक्ति भी येसूबाई के
अप्रत्याशित हमले से हड़बड़ा गया। रायगढ़ के परिसर में एक समय शिवराजा
सम्भाजी ३३