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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 338, कुल 793 में से

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पृष्ठ 338

सह्याद्रि के नदी नालों और पर्वत-घाटियों में रहने वाले लोगों को तैयार और
संस्कारित कर दिया है कि भविष्य में कितने ही आक्रमण हों वे उनका सामना करने
में सक्षम बने रहेंगे।" अपने सहयोगियों को बताते हुए उन्होंने आगे कहा, "आज
हिन्दुस्तान के तटों पर किसी भी फिरंगी की अपेक्षा हमारी सेना संख्या में अधिक है
किन्तु पुर्तगालियों और अँग्रेजों की तोपें अधिक शक्तिशाली और लम्बी दूरी तक
निशाना साधने वाली हैं। वैसा ही शक्तिशाली तोपखाना और वैसे बलवान गोलंदाज
हमारे पास भी होने चाहिए।"
"राजन! इसीलिए तो कुडाल और डिचोली में हमने बारूदों के नये कारखाने
खुलवाये हैं।" कविराज बोले।
"वही कह रहा हूँ।" भायनाक और दरिया सारंग की ओर देखते हुए
शम्भूराजा कहने लगे-"जब जहाज से गोला बाहर फेंका जाएगा, उस समय उस
धक्के से जहाज को हिलना नहीं चाहिए। अभी भी थोड़ा समय है, अपने गोलंदाजों
को प्रशिक्षण दो। तोपों की गति बढ़नी चाहिए। बारूद के गोले आसानी से बाहर
निकलने चाहिए।
बोलते-बोलते शम्भूराजा ने पास में खड़े कत्थई रंग की घनी दाढ़ी वाले
दौलत खान की ओर देखा।
शम्भूराजा से बात करते समय दौलतखान लगातार समुद्र की ओर देख रहा
था। यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी बावरी नजर किसकी प्रतीक्षा कर रही
थी। शम्भूराजा अपने सहयोगियों को बता रहे थे-"जंजीरे का सिद्दी तो हमारे
पैरों में अटका हुआ साँप है। उसे तो कुचलना ही है। किन्तु अँग्रेजों और पुर्तगालियों
की भी नीयत ठीक नहीं है।"
धूप अब बढ़ चुकी थी। हवा में ऊष्मा भी बढ़ गयी थी। एक नक्काशीदार
भागानगरी छाता हाथ में उठाये एक नौकर शम्भूराजा को छाँह दे रहा था। शम्भूराजा
का ध्यान आसपास के ग्रामीण नाविकों पर गया। धान की कटाई जोरों पर थी। पर
खेतों में काम करने वाले केवल बच्चों और महिलाओं के अतिरिक्त कोई न था।
सम्भाजी ने पूछा-"दादजी, फसल की कटाई तो किसानों और बलूतदारों की
दीवाली ही है। फिर मजदूर कैसे मिलेंगे?"
"देखिए सरकार! बढ़ई, लुहार, चमार आदि प्रजा वर्ग के सभी लोग तो आप
के यहाँ काम कर रहे हैं। फसल की कटाई के मौसम में प्रजा वर्ग को दस गुना
मिलता है किन्तु वह सब छोड़कर ये सारे लोग यहाँ आये हैं। स्वराज्य के निर्माण में
हिस्सा लेने।" दादजी ने सूचित किया।
दोपहर को सभी सवार, सरदार, दरिया सारंग, नाविक आदि भोजन के लिए
एकत्र हो आए। बड़े जहाज पर सभी एक ही पंक्ति में बैठे कामाठी और नाविकों की
336 • सम्भाजी