छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 319, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिन्तु कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, "येसूबाई से मेरा निश्चित सन्देश दीजिए कि
हमें अब किसी की बात की चिन्ता नहीं है। तुम्हारे आँचल की छाया में हमारा बेटा
राजाराम सुखी और सुरक्षित रहेगा।"
अश्विन शुक्ल 11 शक सम्वत् 1603, दिनांक 27 अक्टूबर 1681 का दिन
था। सप्तमहल की ओर से रोने की आवाज आने लगी। दासियाँ जोर जोर से रो
रही थीं। सोयराबाई का मृत शरीर बिस्तर पर पड़ा था। शम्भूराजा और येसूबाई
दौड़ते हुए वहाँ आये। सफेद शुभ्र वस्त्रों में सोयराबाई का शरीर काला दिखाई पड़
रहा था। तत्काल राजवैद्य को बुलाया गया। वैद्य ने निदान करके बताया कि पिछली
रात को ही महारानी ने हीरे का टुकड़ा खाकर आत्महत्या की है।
शम्भूराजा ने काले हौद की बगल में, बड़े महाराज के अन्तिम संस्कार के
स्थान के पास सोयराबाई को मुखाग्नि दी। साथ ही भट भिक्षु, दीन दुर्बल, राही
बटोही को दान दक्षिणा दी। राजाराम साहब का वे बहुत ध्यान रख रहे थे।
क्रिया कर्म का कार्यक्रम समाप्त हो गया। पूरा राजमहल रिश्तेदारों से भरा
था। सोयराबाई की याद में शम्भूराजा की आँखें भर आयीं। उन्होंने कहा, "अपने
पुत्र के मोह में हमें बन्दी बनाने से लेकर मारने तक का उपाय उन्होंने किया था।
लेकिन यह मानवी स्वार्थ का एक प्रकार है। किन्तु पिताजी की जवानी में राजगढ़ के
हमारे बचपन में इन्हीं ने हम दोनों को संभाला था। उनके उस प्यार को हम कभी
भूल नहीं सकते। अपनी इन्हीं माताजी पर यह अभियोग लगा कि उन्होंने बड़े
महाराज को विष दिया था। किन्तु ऐसा लांछन लगाकर उनके पतिव्रत धर्म की
पवित्रता को कलंकित करना है। वे स्फटिक सी शुभ्र और पारदर्शी थीं।"
पाँच
"सम्भाजी महाराज आज औरंगजेब ने पूरे हिन्दुस्तान में उपद्रव मचा रखा है। उत्तर
भारत में बहुत से शक्तिशाली हिन्दू और राजपूत सरदार हैं। परन्तु वे सभी उस
बादशाह के अधीन पशु की भाँति विवश हैं।"
"ऐसा?"
"तो क्या उन्हें देश की, धर्म की, किसी को कोई चिन्ता नहीं है? आपने भी
सुना होगा कि औरंगजेब ने हिन्दुओं पर जजिया नाम का अन्यायपूर्ण कर लगाया है।
सम्भाजी :: 317