छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 303, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयीं। उन्होंने यों ही पीछे की ओर मुड़कर देखा। फिर से एक बार राजा का हाथ
खींचकर उनका ध्यान दूसरी ओर घुमाना चाहा। वहाँ के नक्काशीदार खम्भे से
चिपके दस वर्ष के अबोध राजाराम भयभीत दृष्टि से देख रहे थे। वह दृश्य देखते
ही शम्भूराजा होश में आ गये। अपने बच्चे की ओर लपकते पंछी की तरह आगे
बढ़कर राजाराम को सीने से लगा लिया। राजाराम को थपथपाकर, उनके आँसू
पोंछकर वे बोले, "राजा! तुम्हारे आँसुओं में कितनी शक्ति है? तुम्हारे दो बूँद
आँसुओं ने इस आग के समुद्र को निगल लिया।"
दो
सवेरे मवेरे कवि कलश मिलने आये थे। वे किसी दबाव में दिख रहे थे। उत्साही
कविराज कुछ बोल नहीं रहे थे। येसूबाई ने ध्यान में आते ही उनसे पूछा, "कविराज
इतने गम्भीर क्यों हो? क्या बात है?"
येसूबाई को दंडवत करते हुए कविराज ने विनम्रता से कहा, "रानी साहिबा!
आज तक जितना सम्भव हुआ आपके राजा और स्वराज्य की सेवा मैंने की। अब
हमें छुट्टी दें।"
"पर अब कहाँ जा रहे हो?"
"कन्नौज को।"
"वहाँ किसलिए? घर में कुछ धार्मिक अनुष्ठान है क्या?"
"हमेशा के लिए जाने को कह रहा हूँ, महारानी जी।"
"पागल हो गये हैं कविराज आप? शम्भूराजा एक बार अपनी छाया से भी
अलग होकर जी सकते हैं, किन्तु आपके साथ के बिना नहीं।"
येसूबाई ने उन दोनों को अपने दीवानखाने में बिठा दिया। कविराज के प्रस्ताव
पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। महारानी को ज्ञात था कि कविराज के मन को
कौन सा दुख पीड़ित कर रहा था। औंढ़ा के मैदान की उस घटना ने येसूबाई के
हृदय को भी घायल कर दिया था। उन्होंने कहा, "सूखी घास के साथ गीली घास
भी जल जाती है। चिटणीस का पत्र समय पर न पहुँच पाने के कारण यह गड़बड़
हो गयी। चिटणीस जैसा भला आदमी नाहक मारा गया। जो कुछ हुआ, बहुत बुरा
हुआ। उस दिन से स्वामी आपसे भी अधिक बेचैन हैं। रात-बिरात अचानक उठ
सम्भाजी ३०।