छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 259, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंशिवाजी महाराज से कोंडाजी की भूरि-भूरि प्रशंसा सुनी थी। अँधेरी रात में
पन्हालगढ़ की चोटी पर साँप की तरह चढ़कर जाने वाले और केवल चौंसठ मावलों
के साथ आक्रमण करके पन्हालगढ़ जैसे किले पर अधिकार कर लेने वाले जादूगर
अर्थात् कोंडाजी फर्जन्द।
शम्भू महाराज अपने क्रोध को दबाते हुए शान्त स्वर में बोले, "कविराज।
बाजार में तो रोज अफवाहें उड़ती रहती हैं, किन्तु उस बात को राजा से कहने के
लिए प्रधान दीवान को कुछ सबूत तो एकत्र कर लेने चाहिए।"
कवि कलश ने आँखें फैलाई और अपने हाथ का पत्र देते हुए बोले—
"पढ़िए राजन! पंक्ति पंक्ति, अक्षर अक्षर। दडाराजपुरी के सूबेदार ने अपने
हाथों लिखा है। राजन! इसमें और कुछ कहने की गुजाइश नहीं है।"
उस पत्र को पढ़ते हुए शम्भू महाराज को बड़ा क्लेश हुआ। उनका चेहरा
बदल गया। उन्होंने दाँत भींचकर कड़कते स्वर में पूछा—
"कैसे गये? अकेले ही या हमारी सेना मे विद्रोह की आग लगाकर ?"
"अच्छे खासे ग्यारह लोगों का समूह साथ लेकर गये। ऊपर से उन चोरों का
शोर कि शम्भूराजा के शासन में न्याय नहीं बचा है, दिनोंदिन अत्याचार बढ़ रहा है।
ऐसी बहुत-सी शिकायतें उन्होंने उस सिद्दी कासमखान से की है।"
"देखा युवराज्ञी? कितना भरोसा किया था इन पर?"
"अपने ही लोग इस तरह धोखेबाज क्यों हो जाते हैं?"
"जागीरदारी के लिए और किस लिए?" चिन्ताग्रस्त शम्भूमहाराज एक
लम्बी मुस्कान बिखेरते हुए बोले "जागीर की हवस से मराठों का ऐसा ही पतन
होता है।"
कोंडाजी का विद्रोह छिपने लायक नहीं था। वह शीघ्र ही चारों ओर फैल
गया। पूरे रायगढ़ पर एक अशुभ छाया सी पसर गयी। सम्भाजी महाराज बहुत
तनाव में दिखे। कवि कलश ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
"राजन, आज नहीं तो कल, इस सम्बन्ध में कोई न कोई निर्णय लेना होगा।
मराठे हों या ब्राह्मण सभी जागीरदारी के विषय में एक ही तरह पूछते हैं। सभी पूछत
हैं—हमारी जागीरदारी का क्या हो रहा है? हमें अपनी मिल्कियत अपनी मुहर के
पास कब मिलेगी? वह हमारे बाल बच्चों के नाम कब होगी? बड़े महाराज के
प्रभाव से हम उनकी मृत्यु तक चुप रहे। अब और कितने दिन इस मजबूरी के
निकालें?"
कवि कलश के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए शम्भू महाराज की आँखें विलक्षण
रूप से चमकीं। उन्होंने कहा, "मेरे पिताजी मुझसे हमेशा कहते थे जागीर के कारण
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