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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 255, कुल 793 में से

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पृष्ठ 255

अपने शिकार पर टूट पड़ता है, वैसे शम्भू महाराज उन पठानों पर टूट पड़े। चौथे
पठान के दाहिने कन्धे पर तलवार का ऐसा प्रहार किया कि उसका सिर लुढ़क कर
नीचे गिर गया। वह सिर कटी मुर्गी की तरह तड़पने लगा। वह पास के पत्थर के
नीचे गिर गया। वह भयानक दृश्य देखकर पूरा वातावरण भयाक्रान्त हो गया। इतने
में सोनजुही की झाड़ के अँधेरे में छिपा पाँचवाँ पठान शम्भू महाराज की पीठ पर
कूदा। उसकी लम्बाई तीन आदमियों के बराबर थी। अपनी ताकत से उसने शम्भू
महाराज को नीचे दबोच लिया। वह महाराज को नीचे दबाने का प्रयास करने लगा।
नीचे पड़ने से महाराज की कुहनियाँ हिल गयीं। इसी बीच महाराज के कुछ
सहयोगी आ गये और उस हत्यारे को हटाने की कोशिश करने लगे। शम्भुराजा का
दम फूलने लगा था। वे किसी प्रकार एक ओर सरक पाये। दाहिना हाथ मुक्त होते
ही उन्होंने अपनी कटार निकाली और दूसरे ही क्षण पठान के पेट में भोंक दिया।
उस पठान का पेट फाड़ती हुई वह कटार गले के पास जाकर निकली। तब कहीं
वह जल्लाद जाकर एक ओर गिरा।
पीछे आ रहे सहयोगी दौड़कर आगे आये। पास के झरने से पानी लाया गया।
महाराज ने अपने वस्त्र ठीक किये। खंडो बल्लाल कहने लगे—
"महाराज! काल आया था लेकिन समय नहीं आया था।" शम्भू महाराज
हँसे। वे सावधान होते हुए बोले, "सप्तश्रृंगी माता ने आज अलग ढंग से दर्शन देने
का निश्चय किया था। आज बच पाये है, तो उसी के आशीर्वाद से।" सवेरा होते
होते पूजा की गयी। शम्भू महाराज बहुत देर तक सप्तश्रृंगी की डेढ़ पोरिसा ऊँची
पाषाण मूर्ति और उसकी स्निग्ध आँखों की ओर सन्तोषपूर्वक देखते रहे।
महाराज वह ढलान उतरने लगे। अँधेरा छँटने लगा था। घाटी में पहाड़ों के
अस्पष्ट आकार को फिर से आकार मिलने लगा था। मार्कडा पहाड़ की ऊँची
चोटियाँ अब स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। ऐसा लगता था मानो जटाधारी ध्यानस्थ
मार्कंडेय ऋषि महाराज को आशीर्वाद देने के लिए अवतरित हुए हों।
तीन
शिलंगण का सोना लूटा जा चुका था। स्वयं शम्भू महाराज ने स्वराज्य के प्रधान
सेनापति हंबीरराव मोहिते और उनकी रूपाजी, मानाजी जैसे सहयोगियों पच्चीस
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