छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 229, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंहै। वहाँ रामनवमी के दिन बहुत बड़ा मेला लगता है। प्रतिवर्ष हजारों लोग आते हैं।
परन्तु एक समस्या है।"
"कैसी समस्या? सज्जनगढ़ और चाफला के स्वर्गवासी महाराज ने जो
वार्षिक अनुदान निश्चित किया था, वह हमने चालू रखा है। हमने तो अधिकारियों
को कह रखा है कि स्वामीजी को जिस चीज की आवश्यकता हो उसकी तत्काल
पूर्ति की जाय। उसके लिए हमारे आदेश की प्रतीक्षा न की जाय।"
"महाराज, हम वही बता रहे हैं। वे गरीब यात्रियो को कष्ट पहुँचाते हैं।"
शम्भुराजा के चेहरे पर अनेक भाव बने और बिगड़े। उन्होंने तत्काल कवि
कलश को आदेश दिया—"कविराज, वासुदेव बालकृष्ण को शीघ्र पत्र भेजिए।
चाफला के उत्सव और स्वामी जी तथा ईश्वर के निमित्त से चाफला मे बसे ब्राह्मण
परिवारों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करें। व्यवस्था हो जाने पर हमें सूचित करें।"
"जी राजन।"
"इस पत्र की एक प्रति स्वामीजी के पट्टशिष्य देवमूर्ति दिवाकर गोसावी को
भी सूचनार्थ भेज दीजिए।"
चिंचवड़ देवस्थान के स्वामी मोरेश्वर गोसावी को भी गुंडो से परेशानी हो
रही थी। उसकी शिकायत महाराज के पास आयी थी। उनके संरक्षण का आदेश
शम्भुराजा ने अपने सेना अधिकारी को दी थी। राज्याभिषेक का समय समीप आ रहा
था। एक दिन शम्भुराजा जल्दी में किले से नीचे उतरे। वे महाड, मंडनगढ़ पार
करके केलशी की ओर गये। वहाँ समुद्र के किनारे याकूब औलिया फकीर की मजार
थी। वहाँ बाबा की समाधि पर संभाजी राजा माथा टेकते थे। इस स्थान पर वे बड़े
महाराज के साथ अनेक बार आये थे। बाबा के दर्शन किये थे। संभाजी राजा को उन
सभी बातों का स्मरण हुआ। शम्भुराजा ने वहाँ पर अपने तंबू लगाए। समीप ही
अपने मंडनगढ़ किले पर न जाकर वे आठ दिन तक औलिया बाबा की समाधि के
आसपास ही रहे। उन्हें वहाँ बड़ी शान्ति मिली।
रायगढ़ पर राज्याभिषेक की जोरदार तैयारियाँ चल रही थीं। शम्भुराजा के
निजी हलके में तो मानो शादी की व्यस्तता चल रही हो। आज दोपहर मे येसूबाई
को समाचार मिला कि खंडो बल्लाल काशी से वापस आ गये हैं। सन्ध्या हो गयी
फिर शम्भुराजा अभी तक दरबार में व्यस्त थे। राजा के मुख से राज्याभिषेक का
समाचार सुनने के लिए येसूबाई के कान अधीर हो रहे थे। उन्होंने बड़ी बहन
सखूबाई से कहा था। "राज्याभिषेक का मुहूर्त अवश्य निकलेगा। गागाभट्ट के
'मम' बोलने की देर है, बाकी सब तैयारी तो हो चुकी है।
भोजन समाप्त होने पर येसूबाई ने धीरे से पूछा—"खंडोबा और गागाभट्ट की
भेंट नहीं हो पायी क्या?"
सम्भाजी 227