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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 793 में से

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पृष्ठ 161

थे।
"शम्भू बेटे! राज्यशासन चलाते समय गरीब-से-गरीब प्रजा पर यहाँ तक
कि गाय चराने वाले बच्चे से भी श्रद्धा रखो। उन्हें शक्ति दो। मैं अपनी जिन्दगी में
यदि सँभल पाया तो इन्हीं लोगों के भरोसे। इन जमींदारों को तो मैंने हमेशा बगल
में कंकड़ की तरह दबाकर रखा। गाय-भैंस चराने वालों को भी मैंने सैनिक बनाया।
हल चलाने वाले किसानों को भी फौजी बनाया। उनके साहसी हाथों में भाले और
तलवारें दीं। उनके भीतर छिपी चिनगारी को जागृत किया। उन्हीं में कोई तानाजी
कोई मुरारबाजी पैदा हुआ। ये साधारण लोग ही स्वराज्य के साथ हमेशा निष्ठावान
बने रहे।"
बोलते बोलते शिवाजी महाराज कुछ क्षण के लिए रुके। फिर शम्भूमहाराज
का हाथ अपने हाथ में लेकर उन्होंने कहा, "एक समय था जब सिंहगढ़ का हरा
झंडा माताजी की आँखों में काँटे की तरह चुभता था। उसी तरह जंजीरे के किले की
सिद्दीकी वहाँ उपस्थिति मेरे हृदय को घायल करती रहती थी। जंजीरे पर भगवा झंडा
फहराने के लिए हम आठ बार लड़े, बार बार जूझे। किन्तु उस जलदुर्ग ने हमें सदैव
ही धोखा दिया।"
"जंजीरा क्या उतना महत्त्वपूर्ण है?"
"महत्त्वपूर्ण ?"
शिवाजी महाराज की मुद्रा कल्पनामात्र से जवाकुसुम की भाँति अरुणाभ हँसी
में बदल गयी। अपने हाथ की मुट्ठियाँ बाँधते हुए ऊर्जस्वित स्वर में बोले, "बेटे,
देश-विदेश की व्यापारिक नाड़ियों को अपने पैरों के नीचे दबाकर रखने वाला
जंजीरा का वह जालिम किला एक बार अपने अधिकार में ले आइये, फिर देखिए कि
अपने स्वराज्य की सीमा किस प्रकार गंगा-यमुना जाकर पहुँचती है?"
पहले शम्भूमहाराज ने चार वर्ष तक रायगढ़ पर स्थानीय प्रशासन का कार्य
सँभाला था। उनको प्रशासन की बारीकियों, शक्तिशाली बुर्जों, भूमिगत मार्गों की
पूरी जानकारी थी। इसलिए अण्णाजी दत्तो जैसे राज्य कर्मचारी चाहते थे कि
शम्भूमहाराज की जगह छोटे राजाराम गद्दी पर बैठें जिससे राजाराम को राजनीति
सिखाने के बहाने वे अपना हित साध सकें और सत्ता का काजू आराम से खाते रहें।
इसके विपरीत प्रजावर्ग और सेना को शम्भूमहाराज ही राजा के रूप में चाहिए थे।
शम्भूमहाराज स्वार्थी राजकर्मचारियों के लिए संकट बन चुके थे।
दरबारियों की राय थी कि शम्भूराजा को कर्नाटक का राज्य दे दिया जाय और
रायगढ़ के साथ मराठी राज्य राजाराम की झोली में डाल दिया जाय। दरबारी ऐसा
इसलिए चाहते थे कि उनकी प्रतिष्ठा और उनके राज्याधिकार सुरक्षित रहें। स्वराज्य
के बँटवारे की बात सामने आते ही शिवाजी महाराज ने हँसते हुए कहा, "हमारा
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