छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 131, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंगढ़ के नीचे खाई में फौज की छावनी बनाई गयी थी। वहीं पर एक ओर
दिलेरखान और उसके पास शम्भूराजा की छोलदारियाँ खड़ी की गयी थीं। सुबह
होते ही किले से जवाब लेकर दूत वापस आया। युवराज ने 'फिरंगोजी' शब्द पढ़ा
और बिना कोई प्रतिक्रिया व्यक्त किये पत्र को दिलेरखान के हाथ में दे दिया।
"बिना लड़े ही किला छोड़कर हाथ झुलाते हुए चले जाने की रीति शिवाजी
महाराज की सेना की नहीं है। यह रीति तो यवनों की है। शम्भूराजा यह बात आप
अपने मित्र को समझाते क्यों नहीं ?"
जवाब पढ़ते ही दिलेरखान लाल-पीला होने लगा और चीख कर बोला,
"खत का उत्तर देने का यह क्या तरीका है ?"
"खान साहब, एक स्वाभिमानी मराठा इसी स्वाभिमान से व्यवहार करेगा।
क्या सभी लोग इस संभाजी की तरह व्यवहार करने वाले मिलेंगे?"
अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से स्वीकार करते समय संभाजी के चेहरे पर
विषाद
छा गया।
दिलेरखान ने अपनी काजल लगी आँखों की कोर से शम्भूराजा की ओर
देखा। उन्हें मनाते से स्वर में बोला, "शहजादे, रायगढ़ की फालतू बातों को याद
करके कितने दिन तड़पते रहोगे? मराठी राज्य के कानूनन वारिस होने पर भी
रायगढ़ जाने की मनाही, पिताजी तुम्हें अपने साथ लड़ाई पर ले नहीं जाते, सौतेली
माँ राजकार्य की ओर आने नहीं देती, तुम्हारी इज्जत का चिथड़ा करने वाले तुम्हारे
मन्त्री और सरदार हमेशा तैयार खड़े हैं। अरे, ऐसा गैर वाजिब बर्ताव तो किसी
दासीपुत्र के साथ भी नहीं किया जाता।"
"तो क्या आग से तपी हुई मिट्टी खाते-खाते हमें मरना है ?" शम्भूराजा क्रुद्ध
होकर बोले।
युवराज को समझाने के लिए दिलेरखान उनके समीप आ गया और उनका
हाथ अपने हाथ में लेते हुए दुखी स्वर में बोला, "शहजादे, तुम्हारे विपत्ति के दिनों
में हम तुम्हारी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं और तुम दुश्मन की नजर से हमें ही
आँख दिखा रहे हो ?"
युवराज ने कोई उत्तर नहीं दिया। वे चुप बैठे रहे। अब समय व्यर्थ गँवाने में
कोई लाभ न समझकर दिलेरखान ने अपने शामियाने से बाहर आकर लड़ाई का
आदेश सुना दिया। फिर क्या था ! खाई से तोपों के गोले दगने लगे। कान फाड़ देने
वाली तोपों की आवाजें आसपास की खाइयों में प्रतिध्वनित होने लगीं।
थोड़े ही समय में खान के गश्ती सैनिकों ने खान को एक एक खत लाकर
दिया। यह खत फिरंगोजी ने शम्भूराजा के लिए लिखा था। किन्तु शम्भूराजा के पास
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