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सर्वकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 616 में से

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पृष्ठ 8

[ ७ ]

[बायाँ स्तम्भ]
अपत्यकर क्षीरयोग। अपत्यजनन क्षीर
योग। वृष्य पायस योग। वृष्य पूप-
लिका। शतावरी घृत। वृष्य मधुक
योग। उपसंहार।
पुमान्-जातबलादिको वाजीकर-
णपादश्चतुर्थः—स्त्रियो मे रमण करने
और सन्तानवान् होने का विस्तार से
वर्णन,वृष्य बस्तिया। वृष्य माष गुडिका,
वृष्य माहिषरस। पूपलिका योग। वृष्य
घृतभृष्ट मत्स्यमास-गर्भाधानकर योग,
पूपलिका योग। वृष्य पूपलिका योग, वृष्य
माषादि पूपलिका। वृष्ययोग, अपत्यकर
घृत, वृष्य गुटिका। वृष्य उत्कारिका,
वृष्यका लक्षण, शुक्र के क्षय के कारण।
शुक्र प्रवृत्त न होने की दशाए। शुक्र का
मथे जाकर प्रवृत्त होने में आठ कारण,
कवि गंगाधरसेन का मत। कामेच्छा से
शरीर में आने वाली विकृतिया। वीर्य
का महत्त्व। प्रशस्त शुक्र। उपसहार।
तृतीयोऽध्यायः ( पृ० २७३-३२८)
ज्वरचिकित्सितम्—अग्निवेश के
ज्वरसम्बन्धी प्रश्न। गुरु आत्रेय पुन-
र्वसु का समाधान,ज्वर की प्रकृति अर्थात्
स्वाभाविक रूप,ज्वर की उत्पत्ति। शिव-
कोप से ज्वर की उत्पत्ति। ज्वर का
प्रभाव व लक्षण। जन्म मृत्यु के समय
का महातम ज्वर। ज्वर का पूर्वरूप।
ज्वर का अपना स्वरूप,विधि भेद से
ज्वर के दो प्रकार,सौम्य, आग्नेय,वेगा-
भिप्राय से दो भेद प्राकृत, वैकृत-साध्या
साध्य भेद से दो प्रकार, दोष कालादि
भेद से पाच प्रकार, रसादि धातुभेद से

[दायाँ स्तम्भ]
सात प्रकार,कारण भेद से ज्वर के आठ
प्रकार। मानस ज्वर के लक्षण। अन्त-
र्वेग ज्वर के लक्षण। बहिर्वेण ज्वर के
लक्षण। प्राकृत ज्वर के साध्यासाध्य
पर विचार। वैकृत ज्वर के साध्य साध्य
पर विचार। क्षीण शोष सहित असा
ध्य ज्वर। सन्तत ज्वर की उत्पत्ति।
तृतीयक और चतुर्थक ज्वर की उत्पत्ति।
अन्येद्युष्क ज्वर की उत्पत्ति। दोषो की
गति, अन्येद्युष्क, तृतीयक, चतुर्थक के
लक्षण, तृतीयक ज्वर के तीन प्रकार।
चतुर्थक ज्वर के दो प्रकार। चतुर्थक का
भेद विषम ज्वर। ज्वर के पाच प्रकार।
ज्वर के होने मे ऋतु, दिन, रात्रि, मन
के बलाबल की कारणता, चतुर्थकादि का
तृतीयाकादि में परिवर्त्तन। सातों धातुओं
मे आश्रित ज्वर के लक्षण। वात पित्त
ज्वर के लक्षण, वात कफ ज्वर के लक्षण,
कफ पित्त ज्वर के लक्षण। सन्निपातज
ज्वरो का वर्णन, उसके १२ प्रकार।
सन्निपातज्वर के लक्षण, सुश्रुतोक्त
अभिन्यास ज्वर के लक्षण। सन्निपातज
साध्यासाध्यता, आगन्तु-ज्वर के चार
प्रकार। अभिचार और अभिशाप द्वारा
उत्पन्न ज्वर। कामजन्य ज्वर। शोक
जन्य ज्वर। क्रोधजन्य ज्वर, भूताविष्ट
ज्वर के लक्षण। ज्वर का रूप। आम
ज्वर के लक्षण। पच्यमान ज्वर के
लक्षण। निराम ज्वर। नवज्वर में अप-
थ्य। ज्वर मे लंघन। [लघन के लक्षण
और पहचान] दोषो के पाचन। षड-
गपानीय। साम ज्वरो के उपचार।