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सर्वकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 323, कुल 616 में से

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पृष्ठ 323

अ० ३ ] चिकित्सितस्थानम् ३०६
मदनं पिप्पलीभिर्वा कलिङ्गैर्मधुकेन वा ॥ २२८ ॥
युक्तमुष्णाम्बुना पेय वमनं ज्वरशान्तये ।
क्षौद्राम्बुना रसेनेक्षोरथवा लवणाम्बुना ॥ २२६ ॥
ज्वरे प्रच्छर्दनं शस्तं मद्यैर्वा तर्पणेन वा ।
वमन के योग—(१) मैनफल को पिप्पली के साथ, (२) मैनफल को
इन्द्रजौ के साथ, (३) मैनफल को मुलहठी के साथ, गरम जल के अनुपान
से ज्वर-रोगी को वमन देना चाहिये । अथवा पानी के स्थान पर शहद मिला
पानी, गन्ने का रस, नमक मिला पानी या मद्य वा लाजा सत्तूओ से तर्पण,
दोष और रोगी के बलाबलानुसार प्रयोग करे ॥ २२८-२२६ ॥
मृद्वीकामलकाना वा रस प्रस्कन्दनं पिबेत् ॥ २३० ॥
रसमामलकानां वा घृतभृष्टं ज्वरापहम् ।
लिह्याद्वा त्रिवृत चूर्णं संयुक्तं मधुसर्पिषा ॥ २३१ ॥
पिबेद्वा क्षौद्रमासाद्य सघृत त्रिफलारसम् ।
आरग्वध वा पयसा मृद्वीकाना रसेन वा ॥ २३२ ॥
त्रिवृता त्रायमाणा वा पयसा ज्वरितः पिबेत् ।
ज्वराद्विमुच्यते पीत्वा मृद्वीकाभिः सहाभयाम् ॥ २३३ ॥
पयोऽनुपानमुष्णं वा पीत्वा द्राक्षारसं नरः ।
कासाच्छ्वासाच्छिरःशूलात्पार्श्वशूलाच्चिरज्वरात् ॥ २३४ ॥
मुच्यते ज्वरितः पीत्वा पञ्चमूलशृतं पयः ।
विरेचन के योग—अंगूरों का रस (द्राक्षा का क्वाथ) और आवले का
रस मिलाकर विरेचन के लिये पीना चाहिये, या आवलों के रस को घी मे भून
कर पीना चाहिये । इससे ज्वर नष्ट होता है । अथवा निशोथ के चूर्ण को घी
और शहद के साथ चाटना चाहिये । अथवा त्रिफला के क्वाथ (रस) मे घी
ओर मधु मिलाकर पीना चाहिये । अथवा अमलतास के गुदे को दूध के साथ
खाना चाहिये । निशोथ या त्रायमाण के चूर्ण को दूध के साथ पीना चाहिये ।
हरड के साथ ३ गूरों को या द्राक्षाओ को देना चाहिये । अथवा द्राक्षा रस को
पीकर पीछे से गरम पानी पीना चाहिये, इससे ज्वर छूट जाता है ।
पञ्चमूल (कटेरी, बडी कटेरी, शालिपर्णी पृश्निपर्णी और गोखरू अथवा
बृहत्पञ्चमूल) के क्वाथ के साथ सिद्ध किया हुआ दूध, कास, श्वास, शिरो-
वेदना, पार्श्वशूल और पुरातन ज्वर को नष्ट करता है१ ॥ २३०-२३४ ॥
१ पञ्चमूल २ तोले, दूध १६ तोले, पानी ६४ तोले इसमे से दूध बचाना
चाहिये ।