सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 235, कुल 616 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 235

पा० ३ ] चिकित्सितस्थानम् २२१
ये दीर्घ आयुवाले महर्षि यथेच्छ ज्ञान, तप, ब्रह्मचर्य, अध्यात्म ध्यान
( ब्रह्मध्यान ) का सञ्चय करके स्वर्ग मे गये । इसलिये प्राणों की कामना
रखनेवाले सुख, आरोग्य के इच्छुक पुरुषों को चाहिये कि दीर्घायु प्राप्त
करने के लिये विधिपूर्वक बड़ी सावधानी से रसायन-विधि का सेवन करें ॥२२॥
तत्र श्लोकः—रसायनानां संयोगाः सिद्धा भूतहितेषिणा ।
निर्दिष्टाः प्राणकामीये सप्तत्रिंशन्महर्षिणा ॥ २३ ॥
प्राणियों के हित को चाहनेवाले महर्षि आत्रेय ने प्राणकामीय अध्याय में
रसायनों के ये ३७ प्रयोग बतलाये हैं ॥ २३ ॥
इत्यग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते चिकित्सास्थाने प्राणकामीयो
नाम रसायनपादो द्वितीयः ।
( तृतीयः पादः )
अथातः करप्रचितीयं रसायनपादं व्याख्यास्यामः ॥ १ ॥
इति ह स्माऽऽह भगवानात्रेयः ॥ २ ॥
अब हम ‘करप्रचितीय’ नामक अध्याय की व्याख्या करते हैं । भगवान्
आत्रेय ने ऐसा उपदेश किया है—॥ १-२ ॥
करप्रचितानां यथोक्तगुणानामामलकानामुद्धृतास्थीनां शुष्कचूर्णि-
तानां पुनर्माघे फाल्गुने वा मासे त्रिःसप्तकृत्वः स्वरसपरिपीतानां पुनः
शुष्कचूर्णीकृतानामाढकमेकं ग्राहयेत्, अथ जीवनीयानां बृंहणीयानां
स्तन्यजननानां वयःस्थापनानां षड्विरेचनशताश्रितीयोक्तानामौषधग-
णानां चन्दनागुरु-धव-तिनिश-खदिर-शिंशपासन-साराणां चाणुशः
क्षिप्तानामभया-बिभीतक-पिप्पली-वचा-चव्य-चित्रक-विडङ्गानां च सम-
स्तानामाढकमेकं दशगुणाम्भसा साधयेत्, तस्मिन्नाढकावशेषे रसे
सुपूते तान्यामलकचूर्णानि दत्त्वा गोमयाग्निभिर्वंश विदल-शर-तैजना-
ग्निभिर्वा साधयेद्यावदपनयाद्रसस्य, तमनुपदग्धमुपहृत्यायसीषु पात्री-
ष्वास्तीर्य शोषयेत्, सुशुष्कं कृष्णाजिनस्योपरि तद्-दृषदि श्लक्ष्णपिष्ट-
मयःस्थाल्यां निधापयेत्सम्यक्, तच्चूर्णमयश्चूर्णाष्टभागसं प्रयुक्तं मधुस-
र्पिभ्यामग्निबलमभिसमीक्ष्य प्रयोजयेदिति ॥ ३ ॥
आमलकायस ब्रह्म रसायन—माघ या फाल्गुन मास में पूर्वोक्त गुणोंवाले
आवलों को वृक्ष पर से हाथों द्वारा तोड़ कर एकत्र करे ( भूमि पर गिरे आवकों