चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ १३ ]
योग-साम और निराम मल की परीक्षा- | भासव । मूलासव । पिण्डासव । मध्व-
अपवाद । चित्रकाद्य गुडिका-छ योग । | रिष्ट । क्षार घृत । पिप्पल्यादि योग ।
वमन, अर्श, ग्रन्थि-शूल मे सिद्ध योग । | तीन क्षार । क्षार गुडिका । वत्सकादि
आमयुक्त । शूल मे सिद्धयोग । अग्नि- | योग । अग्निवर्धक त्रिफलादि क्षार योग।
वर्धक पिप्पल्याद्य-चूर्ण । मरिचाद्य चूर्ण। | त्रिदोषजन्य ग्रहणी मे पञ्च कर्म । कफ
अन्य योग । पञ्च प्रकार यवागू । भोज- | की प्रबलावस्था मे वमनादि विधि ।
नादि व्यवस्था । तक्र प्रयोग । तक्रारिष्ट, | मन्दाग्निवाले को दीपनीय ओषधि
चन्दनाद्य घृत । तिक्त घृतो का प्रयोग । | साधित घृत पान । नाना प्रकार की
नागराद्य चूर्ण । भूनिम्बादि चूर्ण । | महा अग्नियो पर अनेक उपचार । अग्नि-
किराताद्य चूर्ण । कफजन्य ग्रहणी मे | मान्द्य का कारण । भस्मक चिकित्सा ।
वमन-पलाशादि योग । अग्निवृद्ध्यर्थ | सम्प्राप्ति । उसके १८ उपचार । पथ्य ।
योग । मध्वासव । मधूकासव । दुराल- | देश-काल विचार से भोजन विधि ।
| उपसंहार ।