चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 10, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ें[Header]
[ ० ]
[बायाँ स्तम्भ / Left Column]
वातगुल्म चिकित्सा । पैत्तिक गुल्मचि-
कित्सा । शमन योग । रक्तमोक्षण ।
अपक्व गुल्म के लक्षण । विद्ह्यमान
गुल्म के लक्षण, पक्व गुल्म के लक्षण,
गुल्म के दो प्रकार अन्तस्थ और
बहिस्थ । वमन के योग । कफगुल्म मे
घृत पान आदि । अरिष्ट प्रयोग के काल
त्र्यूषणादि घृत । गुल्म षट्पल घृत ।
हिंगुसौवर्चलादि घृत । हबुषाद्य घृत ।
पिप्पल्याद्यघृत । हिंग्वादि चूर्ण । हिंग्वा-
दि गुटिका । शट्यादि वटी । नागरादि
योग । लशुनक्षीर । तैलपञ्चक । शिला-
जतु प्रयोग । अन्य योग, स्वेद प्रयोग ।
गुल्मनाशक बस्तिक्रिया । गुल्मनाशक
तैल । नीलिन्याद्य घृत । वातगुल्म मे
पथ्य । रोहिण्याद्य घृत । त्रायमाणाद्य
घृत । आमलकाद्य घृत । द्राक्षाद्य घृत ।
वासा घृत । कफगुल्म की चिकित्सा ।
दशमूली घृत । भल्लातकाद्य घृत ।
पञ्चकोल घृत । मिश्रक स्नेह । वातगुल्म
और कफगुल्म मे विरेचन । दन्तिह-
रीतकी । अन्य योग । आहार । असा-
ध्यता । रक्तगुल्म की चिकित्सा । पला-
शक्षार यमक । गुल्मनाशक अनेक योग ।
वातगुल्म और कफगुल्म में सशमन-
चिकित्सा । उपसंहार ।
षष्ठोऽध्यायः ( पृ० ३७५-३८६ )
प्रमेहचिकित्सितम्—कफप्रमेह का
निदान । सम्प्राप्ति । प्रमेह के बीस भेद ।
उनके तीन कारण समक्रिया, विषम
क्रिया और महात्यय । दस प्रकार के
कफजन्य प्रमेह । पित्तजन्य छ. प्रमेह ।
[दायाँ स्तम्भ / Right Column]
४ प्रकार के वातिक प्रमेह । पूर्वरूप ।
प्रमेह रोगियों के दो प्रकार । उपचार ।
कफप्रमेह क दस योग । कफप्रमेह और
पित्तप्रमेह मे पथ्य । त्रिकण्टकाद्य तैल,
घृत और यमक । लोध्रासव । दन्त्या-
सव । भल्लातकासव । षडङ्गपानीय
विधि से साधित मद्य का योग । प्रमेह-
नाशक अनेक योग । साध्यासाध्य रूप
उपसंहार ।
सप्तमोऽध्यायः ( पृ० ३८६-४१५ )
कुष्ठचिकित्सितम्—कुष्ठ के हेतु,
सम्प्राप्ति । कुष्ठ का पूर्वरूप । १८ कुष्ठों
के लक्षण । सात महाकुष्ठो के लक्षण
उदुम्बर, मण्डल, ऋष्यजिह्व, पुण्डरीक,
सिध्मकुष्ठ, काकणक कुष्ठ । क्षुद्र कुष्ठ
के १६ प्रकार । दोषो की प्रधानता ।
तीनो दोषो के लक्षण । साध्य असाध्य
कुष्ठ । चिकित्सा । वमन योग । विरेचन
द्रव्य । आस्थापन योग । नस्य ।
किलासनाश । वैरेचनिक योग । मण्डल
कुष्ठो का उपचार । पटोलादि काथ ।
मुस्तादि चूर्ण । त्रिफलादि चूर्ण, लेली-
हक प्रयोग । पारद योग । हीरकादि
योग । मध्वासव । कनकबिन्द्वरिष्ट ।
वात, कफ और पित्तजन्य कुष्ठो पर
योग । पथ्यापथ्य । चित्रकादि लेप ।
मास्यादि लेप । त्रप्वादि लेप । सिद्धार्थक
स्नान । आठ कषाय । त्रिफलादि कषाय,
कुष्ठाद्य तैल । श्वेतकरवीराद्य तैल ।
श्वेतकरवीरपत्राद्य तैल । तिक्तैक्ष्वाकु
तैल । कनकक्षीरी तैल । सिध्म लेप ।
विपादिकाहर घृत-तैल । मण्डल कुष्ठ-