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सर्वकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

पृष्ठ 347, कुल 639 में से

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पृष्ठ 347

अ० २७ ] सूत्रस्थानम् ३२६
काकुलीम्मृग (मालुया सर्प) की चार श्रेणियां हैं यथा—श्वेत, काली, चित-
कबरी और कालक, कूर्चाका चिल्लट (चियार), मेंढक, शल्लक, गोह, गाण्डक
(गोह का भेद, सर्पणी), कदली, नेवला, श्वावित् ये भूमिशय या बिलेशय
अर्थात् बिल में रहनेवाले हैं ॥ ३७-३८ ॥
सृमरश्चमरः खङ्गो महिषो गवयो गजः ।
न्यङ्कुर्बराहश्चानूपा मृगाः सर्वे रुरुस्तथा ॥ ३६ ॥
सृमरः (सूवर) चमर (चमरिया गाय), गेंडा, भैसा, नील गाय, हाथी
न्यंकु (हरिण), सुअर (छोटा) और रुरु (बारह सींगा) ये सब 'आनूप'
अर्थात् जल बहुल प्रदेश के पशु हैं ॥३६॥
कूर्मः कर्कटको मत्स्यः शिशुमारस्तिमिंगिलः ।
शुक्ति-शङ्खोद्र-कुम्भीर-चुलुकी-मकरादयः ॥ ४० ॥
इति वारिशयाः प्रोक्ताः, वक्ष्यन्ते वारिचारिणः ।
कछुआ, केकड़ा, मछली, तिमिंगिल (मछली भेद), सीप शंखमें होने वाले
जन्तु शिशुमार, उद्र (जल बिडाल, ऊदबिलाव) कुम्भीर (नाका), चुलुकी,
और मकर ये 'वारिशय' अर्थात् जल में रहने बाले जन्तु हैं। पानी पर रहने वाले
प्राणियों के नाम कहते हैं ॥ ४० ॥
हंसः क्रौञ्चो बलाका च बकः कारण्डवः प्लवः ॥ ४१ ॥
शरारिः पुष्कराह्वश्च केशरी मानतुण्डकः ।
मृणालकण्ठो मद्गुश्च कादम्बः काकतुण्डकः ॥ ४२ ॥
उत्क्रोशः पुण्डरीकाक्षो मेघरावोऽम्बुकुकुटी ।
आरा नन्दीमुखी वाटी सुमुखाः सहचारिणः ॥ ४३ ॥
रोहिणी कामकाली च सारसो रक्तशीर्षकः ।
चक्रवाकास्तथाऽन्ये च खगाः सन्त्यम्बुचारिणः ॥ ४४ ॥
हंस, क्रौंच, बलाका, बगुला, कारण्डव (हंसभेद बत्तख), प्लव, शरारि,
पुष्कराह, केशरी, मानतुण्डक, मद्गु (जलकौवा), कादम्ब, काकतुण्ड,
उत्क्रोश (कुरल), पुण्डरीकाक्ष, मेघराव (मेघनाद मोर), अम्बुकुकुटी (पानी
की मुर्गी), आरा, नन्दीमुखी, वाटी, सुमुख, सहचारी, रोहिणी, कामकाली,
सारस, लाल शिर बाला सारस, चक्रवाक (चकवा) और अन्य जलचर पक्षी
पानीमें विचरने वाले हैं ॥४१-४४॥
पृषतः शरभो रामः श्वदंष्ट्रा मृगमातृका ।
शशोगण्डो कुरङ्गश्च गोकर्णः कोट्टकारकः ॥ ४५ ॥