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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 639 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 34

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१८ चरकसंहिता [ अ० १
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रसनेन्द्रिय से ग्राह्य गुण रस है। इस रस की उत्पत्ति में आधार कारण जल
और पृथिवी हैं। इस रस के भेद करने में आकाश, वायु और अग्नि ये तीनों
निमित्त कारण होते हैं। वास्तव में रस की उत्पत्ति स्थान जल है और पृथिवी
इसका आधार है। क्योंकि एक द्रव्य दूसरे द्रव्य से मिल जाता है। "विष्टं
ह्यपरं परेण" न्याय०। जल और पृथ्वा म आकाश, वायु और अग्नि का भी
अंश समाविष्ट रहता है। कहा भी है—
तेषामेकगुणं पूर्वं गुणवृद्धिः परे परे।
पूर्वः पूर्वो गुणश्चैव क्रमशो गुणिषु स्मृतः ॥
इसीलिए, इस एक रस के छः भेद हो जाते हैं। जैसे—पृथिवी और जल
की अधिकता से मधुर, पृथिवी और अग्नि की अधिकता से अम्ल, जल और
अग्नि की अधिकता से लवण, वायु और अग्नि की अधिकता से कटु, वायु
और आकाश की अधिकता से तिक्त और वायु और पृथिवी की अधिकता से
कषाय रस बनता है ॥ ६४ ॥
स्वादुरम्लोऽथ लवणः कटुकस्तिक्त एव च ।
कषायश्चेति षट्कोऽयं रसानां संग्रहः स्मृतः ॥ ६५ ॥
स्वादु मधुर, अम्ल, लवण, कटु, तिक्त और कषाय ये छः संक्षेप से रस
हैं। विस्तार से इनके परस्पर संयोग से ६३ भेद हो जाते हैं ॥ ६५ ॥
रसों के द्वारा दोषों की शान्ति--
स्वाद्वम्ललवणा वायुं, कषायस्वादुतिक्तकाः ।
जयन्ति पित्तं, श्लेष्माणं कषायकटुतिक्तकाः ॥ ६६ ॥
स्वादु, अम्ल और लवण ये रस वायु का शमन करते हैं, कषाय, मधुर और
तिक्त रस पित्त को, कषाय, कटु और तिक्त रस कफ को शान्त करते हैं। कटु,
अम्ल और लवण रस पित्त को कुपित अर्थात् उत्पन्न करते और बढ़ाते हैं,
स्वादु, मधुर अम्ल और लवण रस कफ को, कटु, तिक्त और कषाय रस वायु
को बढ़ाते हैं। इन रसों में प्रत्येक रस के द्रव्य, गुण और कर्म आगे (आत्रेय
भद्रकाप्यीय नामक २६ वें अध्याय) में विस्तार से कहेंगे ॥ ६६ ॥
द्रव्य के भेद—
किञ्चिद्दोषप्रशमनं किञ्चिद्धातुप्रदूषणम् ।
स्वस्थवृत्तौ हिते किञ्चित् त्रिविधं द्रव्यमुच्यते ॥ ६७ ॥
द्रव्य तीन प्रकार के हैं। (१) कुछ द्रव्य वात आदि दोषों का शोधन
एवं शमन करते हैं। जैसे—तेल वायु का, घी पित्त का और मधु कफ का