सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

पृष्ठ 192, कुल 639 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 192

१७४ चरकसंहिता [ अ० १४
की पोटली बांध कर आंख पर स्वेद देना चाहिये। स्वेद देने से पूर्व आंख को
कमल, या नीला कमल इनके पत्तों से ढांप लेना चाहिये। शीतल मोतियों की
मालाओं से, शीतल पात्रों से, जल से भीगे कमलों से और हाथों से स्वेदन
किये जाते रोगी के हृदय को स्पर्श करता रहे ॥११-१२॥
शीत-शूल व्युपरमे स्तम्भ-गौरव-निग्रहे।
संजाते मार्दवे स्वेदे स्वेदनाद्विरतिर्मता ॥ १३ ॥
सरदी और वेदना हट जाने पर, शरीर में जड़ता तथा भारीपन प्रतीत न
होने पर और शरीर में कोमलता उत्पन्न होने से,तथा शरीर पर पसीना आ जाने
पर स्वेद देना बन्द कर दे ॥१३॥
पित्तप्रकोपो मूर्च्छा च शरीर-सदनं तृषा ।
दाहः स्वेदाङ्ग-दौर्बल्यमतिस्विन्नस्य लक्षणम् ॥ १४ ॥
उक्तस्तस्याशिताये यो ग्रैष्मिकः सर्वशो विधिः ।
सोऽतिस्विन्नस्य कर्तव्यो मधुरः स्निग्धशीतलः ॥ १५ ॥
अतिस्वेदन के लक्षण और उपचार-अतिस्वेद देने से पित्त का प्रकोप,
मूर्च्छा, शरीर में सुस्ती, प्यास का लगना, जलन, पसीने का बहुत आना, अंगों
में निर्बलता आ जाती है। अतिस्वेद के लिये 'तस्याशितीय' (अध्याय ६ में)
कही हुई ग्रीष्म ऋतु की मधुर, स्निग्ध, शीतल गुणवाली सम्पूर्ण परिचर्या
(मद्य विधि को छोड़ कर) करे। यह अतिस्वेद की चिकित्सा है ॥१४-१५॥
कषाय-मद्य-नित्यानां गर्भिण्या रक्तपित्तिनाम् ।
पित्तिनां सातिसाराणां रूक्षाणां मधुमेहिनाम् ॥ १६ ॥
विदग्ध-भ्रष्ट-भ्रघ्नानां विष-मद्य-विकारिणाम् ।
श्रान्तानां नष्टसंज्ञानां स्थूलानां पित्तमेहिनाम् ॥ १७ ॥
तृष्यतां क्षुधितानां च क्रुद्धानां शोचतामपि ।
कामल्युदरिणां चैव क्षतानामाढ्यरोगिणाम् ॥ १८ ॥
दुर्बलातिविशुष्काणामुपक्षीणौजसां तथा ।
भिषक् तैमिरिकाणां च न स्वेदमवतारयेत् ॥ १६ ॥
स्वेद न देने योग्य व्यक्ति-जो वात-कफ प्रकृति के मनुष्य नित्य प्रति
पाचनादि कषायों और मद्य का सेवन करते हों, गर्भवती, रक्त-पित्त रोगी, पित्त
प्रकृति या पित्त जन्य रोग वाले व्यक्ति, अतिसार रोगी, रूक्ष प्रकृति, मधुमेही,
सब प्रकार के प्रमेह रोगी, इनमें भी खास कर मधुमेह के रोगी, जिनकी गुदा
पक गई हो, या गुदा बाहर आगई हो, विषरोगी, या नशे में मस्त अथवा