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चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 639 में से

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पृष्ठ 15

( ६ )

[बायाँ स्तम्भ]
का हेतु । रक्तपित्त के पूर्वरूप । रक्तपित्त
के उपद्रव । रक्तपित्त के दो मार्ग साध्य
असाध्य के विचार । रक्तपित्त का इति-
हास । ऊर्ध्वगामी रक्तपित्त साध्य ।
अधोगामी रक्तपित्त याप्य । उभयमार्ग-
गामी रक्तपित्त असाध्य । द्विदोषज या
त्रिदोषज रक्तपित्त की चिकित्सा ।
साध्य रोग के असाध्य हो जाने के
कारण । असाध्य रक्तपित्त के लक्षण ।
उपसंहार ।
तृतीयोऽध्यायः
(पृ० ४२८-४३६)
गुल्मनिदानम्—गुल्म के पांच
भेद—वातगुल्म, पित्तगुल्म, कफगुल्म,
निचयगुल्म, रक्तगुल्म । इनके सम्बन्ध
में अग्निवेश का प्रश्न । वातगुल्म ।
सम्प्राप्ति और लक्षण । वात के साथ
पित्त प्रकोप के कारण । पित्तगुल्म की
सम्प्राप्ति । वात के साथ कफ प्रकोप
के कारण । कफगुल्म की सम्प्राप्ति ।
सान्निपातिक गुल्म । रक्तगुल्म । रक्त-
गुल्म की सम्प्राप्ति । गुल्म का पूर्वरूप
उपसंहार ।
चतुर्थोऽध्यायः
(पृ० ४३६-४५०)
प्रमेहनिदानम्—प्रमेहों की
संख्या । रोगों के विधान भेद-अध्याय ।
कफप्रमेह के कारण । कफप्रमेह के
दूष्य । कफप्रमेह की सम्प्राप्ति । विकृत
कफ के दश गुण । कफजन्य दश
प्रमेह । जैसे उदकमेह, इक्षुवालिकामेह,
सान्द्रमेह, सान्द्रप्रसादमेह, शुक्रमेह,


[दायाँ स्तम्भ]
शुकमेह, शीतमेह, सिकतामेह, शनैर्मेह,
आलालमेह । पित्तप्रमेहों के कारण
और सम्प्राप्ति । पित्तजन्य छः प्रमेह ।
क्षारमेह, कालमेह, नीलमेह, लोहितमेह
मञ्जिष्ठामेह और हारिद्रमेह । पित्त-
प्रमेहों का विशेष विज्ञान । वातजमेह
के कारण । उनके प्रकार वसाप्रमेह,
मज्जमेह, हस्तिमेह, मधुमेह । सब वातज
मेह असाध्य । वातप्रमेहों का विशेष
विज्ञान । प्रमेहों के पूर्वरूप । प्रमेह के
उपद्रव । चिकित्सा । प्रमेह किन को
होता है । उपसंहार ।
पञ्चमोऽध्यायः
(पृ० ४५०-४५४)
कुष्ठनिदानम्—कुष्ठ रोग की
उत्पत्ति । कुष्ठ के सात भेद । तर-तम
भेद से कुष्ठों के असंख्य भेद । कुष्ठ
रोग के कारण । कुष्ठ रोग के पूर्वरूप ।
कपाल कुष्ठ । उदुम्बर कुष्ठ । मण्डल
कुष्ठ । ऋष्यजिह्व कुष्ठ। पुण्डरीक कुष्ठ।
सिध्म । काकणक कुष्ठ । साध्य असा-
ध्य भेद । उपद्रव । उपसंहार ।
षष्ठोऽध्यायः
(पृ० ४५४-४६३)
शोषनिदानम्—शोष के चार
कारण । शोष का कारण साहस, ।
शोष रोग का कारण वेग-संधान्धारण, ।
क्षय का विवरण । शुक्रक्षय । शोष का
कारण विषमाशन । राजयक्ष्मा शब्द की
निरुक्ति । शोष के पूर्वरूप । राजयक्ष्मा
के ११ रूप । राजयक्ष्मा के साध्य और
असाध्य रूप । उपसंहार ।