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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पाठान्तर—बम्बई और मनेर प्रति—
शीर्षक—(बं ) बयान गुफ्तन राव करंगा लोरक व चाँदा रा (लोरक
और चाँदा को राव करंगा का उत्तर) (म०) रीसैण्ड्स प्रतिके समान ।
१—(बं ) राजा : (म ) राजै । २—(बं ) बूझी : (म ) बाहँहि ।
३—(बं ; म ) सो । ४—(बं ) कहु कबहुँ । ५—(म ) अबहुँ कहु
सो र हाँ करौं । ६—(ब ) जी मारे के खरि पिराया (म ) जी मारौ के
छुरी मरी । ७—(ब म ) लोरक । ८—(म) नरिन्दर । ९—(बं )
मेदिन कहै बड़ा है राउ । (म ) मेदिन कहै भला है राउ । १ —(बं )
राठ हुतै न होइ अन्याऊ; (म ) राय हुतै बड़ होइ न काऊ । ११—
(ब ) तुम नरबइ अस्बाठ न जानहु (म ) जो तुम्ह नरबइ निकाहि
जानहु । १२—(बं ) जो सुर करहि देस कहँ पानहु (म ) जो मस
होइ छोइ तुम्ह मानहु । १३ (ब ) राजा भया करउ तुम हरदी पठवहु
मोहि (म ) राजा भया मोह कइ, हरदी पठवहु मोहि ।
३३०
( रीसैण्ड्स २५० )
शफ़कत कर्दने राव करका बर लोरक
( राव करका का लोरकके प्रति उदारता प्रकट करना )
रावैं आगे लोर हँकारा । अँकवन' लाइ पाट बैसारा ॥१
पूछइ बात लोर महँ कूहऊ । माँस चार तुम इहवाँ रहऊ ॥२
पुनि मैं पठउब पाटन लोरा । बार न बंफा होइ बिहि तोरा ॥३
चाँदहि आन मंदिर बैसावहु । तुम्ह सँसोइ छतसार उतारहु ॥४
घोर आन बाँधहु घोरसारा । हमार कुटुंब वानउ परिवारा ॥५
सुन लोरक अस भवैं, राजा हम न रहाहिं ।६
गोवर छोड़ हम आये इहवाँ, अब हरदी दिसि जाहिं ॥७
टिप्पणी—(१) अँकवन—अँकमे।
(२) इहवाँ—यहाँ।
(३) पठउब—भेजूँगा । बंका—धोखा देना ।
(६) रहाहिं—रहेंगे ।
(७) जाहिं—जा रहे हैं ।