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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१६१
(रौकेन्ड्स ११६। बम्बई ११)
आमदने लश्करे गोबर बर रवानये महर व नशिस्तने ईशाँ
(मगरिकोंका महरके घर आकर बैठना)
महर' मंदिर सब नेत बिछाई । कै खँडवान कुण्ड मराई ॥१
गोबर नोता हुत' सोइ भुलावा । विहवीसो' पार समै लै'आवा ॥२
घटहि न सूसँ सरह जनु चढ़ी । ठपना देस मंदिर गा मढ़ी ॥३
बैस कुँवर गे पांतिहिं पाँती । परखा पीन सो भाँवहिं भाँती ॥४
खोरक महरें पाट बैसारा । गहन भार जैं चाँद उबारा ॥५
घरन घर भरि बैठे, अगनित कही न जाइ ॥६
खेत साथ लहि आँगन, तोहु लोग न समाइ ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—वरास्त करने कतूरी बर खानये राय महर (महरके घर भोजकी तैयारी) ।
१—महरें । २—राम । ३—हुँच । ४—बैहीचो । ५—पक्ति । ६—सूसहि । ७—कोरम ।
१६२
(बम्बई १२। रौकेन्ड्स १२)
आमदने तमाम दर मज्लिसे हरकिन्त
(नाना प्रकारके व्यंजनोंका परसा जाना)
बैठी पार पसारि पँवारा । मात परोसहिं झार सुवारा' ॥१
पतरी भरहिं मूँस बछवानों' । भाँतहिँ भाँति लोर पहँ आनों ॥२
मास ममोरों खरवों फुनि भरी । ढानों सौ सो गुन पत धरी ॥३
लै मसमार तुलाने नाऊ । धिरत खाँड कीन्ह पैराऊ ॥४
घर पकवान जेवहुँत कजे । फल सन्धान साख एक अहे ॥५