चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८१
१
(बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर)
पहिले गावउँ सिरजनहारा । जिन सिरजा इह देषस यपारा ॥१
सिरजसि धरती और अकासू । सिरजसि मेरु मँदर कबिलासू ॥२
सिरजसि चाँद सुरुज उजियारा । सिरजसि सरग नखत का मारा ॥३
सिरजसि छाँह सीउ औ घूपा । सिरजसि फिरतन और सरूपा ॥४
सिरजसि मेघ पवन अँधकारा । सिरजसि बीजु करै चमकारा ॥५
बाफर सबै पिरिथिमी, कहेउँ एक सो गाइ ॥६
हिय पषरै मन हुलसै, दूसर चित न समाइ ॥७
टिप्पणी-(१) सिरजनहारा-सृष्टिकर्त्ता, ईश्वर । यपारा-वायु ।
(२) मेरु-सुमेरु पर्वत । मँदर-मन्दराचल । कबिलास-(कैलास>
कब्लास>कबिलास (बकारका प्रक्षेप-कबिलास) कैलास पर्वत;
ऊँचे महल और स्वर्गके अर्थमें भी जायसी आदिने कबिलासका प्रयोग
किया है।
(४) सीउ-शीत !
(५) अँधकारा-अन्धकार । बीजु-बिजली ।
६
(बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर)
पुरुख एक सिरजसि उजियारा । नाँउ मुहम्मद जगत पियारा ॥१
तहिँ लगि सपै पिरिथिमी सिरी । औ तिह नाँउ मौनदी फिरी ॥२
टिप्पणी-(२) मौनदी-मुनादी; ढिंढोरा ।
७
(बीकानेर प्रतिके प्रकाशित पाठके आधारपर)
अबाबकर उमर उसमान, अली सिंघ ये चारि ॥६
ये निहचु कर बिज तिस, तुरहि झाले मारि ॥७
टिप्पणी-(१) मुहम्मद साहबके पश्चात् अबा बकर (अबू बकर) (६३२-६३४ ई )
उमर (६३४-६४४ ई ) अली (६४४-६५६ ई ) और उसमान
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