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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

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पृष्ठ 730

७०२ बृहत्संहिता
कस्योक्तिरियम्?
(अ) वसिष्ठस्य (स) गर्गस्य
(ब) शौनकस्य (द) समुद्रस्य
३१८. दीर्घग्रीवा कुमारी भवति—
(अ) कुलक्षयकरी (स) क्रूरप्रकृतिका
(ब) निर्धना (द) कुटिला
३१९. कुलक्षयकरी दीर्घा ग्रीवा ह्रस्वा च निर्धना ।
पृथूत्थया प्रचण्डत्वं ग्रीवया योषितो वदेत् ॥
कस्येदं पद्यम्?
(अ) शौनकस्य (स) कश्यपस्य
(ब) वसिष्ठस्य (द) समुद्रस्य
३२०. पारावताक्षी या कन्या कातराक्षी तथापि या।
उद्भ्रान्तचपलाक्षी च तां कन्यां वर्जयेद्बुधः ॥
यस्यास्तु हसमानाया जायन्ते गण्डकूपकाः ।
भर्तारं हन्ति सा क्षिप्रं नैकत्र रमते चिरम् ॥
कस्य वाक्यमिदं स्पष्टयत?
(अ) पराशरस्य (स) गौतमस्य
(ब) कश्यपस्य (द) समुद्रस्य
३२१. लम्बललाटा कं हन्ति?
(अ) श्वसुरम् (स) देवरम्
(ब) पतिम् (द) ज्येष्ठपतिम्
३२२. लम्बोदरी कं हन्ति?
(अ) श्वसुरम् (स) पतिम्
(ब) देवरम् (द) ज्येष्ठपतिम्
३२३. स्तनरोमा कीदृशी भवति?
(अ) चौरा (स) क्रूरा
(ब) कुटिला (द) परवेश्मरता
३२४. कीदृशाः दन्ताः कुमारीणां वैधव्यकारकाः?
(अ) स्थूलाः (स) बहिर्गताः
(ब) दीर्घाः (द) कृष्णमांसाः
३२५. का स्त्री भर्तुर्निधनकारिणी भवति?
(अ) उच्चोत्तरोष्ठा (स) दीर्घदन्ता
(ब) रूक्षकेशाः (द) विषमदन्ता-
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