बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरविजे विण्वह्निहतः ६००
Wait, look at 'विण्वह्निहतः':
व + ि = वि
ण + व = ण्व
ह + न + ि = ह्नि
ह + त + ः = हतः
Yes, "विण्वह्निहतः ६००"!
Line 27: प्रद्वेषो यवसाम्भसां प्रपतनं ४६२
Line 28: प्रब्रूत सत्यं कतरोऽङ्गनानां २९२
Wait, "प्रब्रूत" or "प्रब्रूत"? It's 'प्रब्रूत' (प + र + ब + र + ू + त: प्रब्रूत).
Line 29: प्रभूतवस्त्रादाश्विनी २७८
Line 30: प्रमथाधिपो गजमुखः १५५
Line 31: प्रमदागर्भविनाशः ४२०
Line 32: प्रमदाशिरउपगतपूर्ण ४८७
Line 33: प्रलम्बबाहुः पृथूपीनवक्षाः ६२८
Wait, at the very bottom:
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammpu. Digitized by S3 Foundation USA
Let's double check row 27 left:
"पुरुषश्रटुलानि कामिनीनाम् २९५"
Wait, could it be "पुरुषच्छटुलानि"?
Notice line 3 right: "पूर्वच्छ