बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)
Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary
आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा
DevanagariHindipublished760 पृष्ठ
पृष्ठ 675, कुल 760 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 675
- चण्डाधृष्या पद्महेमाग्निवर्णा २३६ | छत्रचितियूपहुतवह ५२७
19. चतुःषष्टिपदं कार्यं १२४ | छत्रध्वजस्वस्तिकवर्धमान २८१
20. चतुरङ्गुलं वसिष्ठः १३९ | छत्रस्रगम्बरयुतः ६२
21. चतुरस्रं धूर्तानां २२३ | छागशुभाशुभलक्षणं १८२
22. चतुरस्रमवनिखाते १५२ | छायाः क्रमेण कुजलाग्न्यनिला २३७
23. चतुर्थं ग्रहं सूर्यपुत्रेऽभ्युपेते ६०२ | छायाशुभाशुभफलानि २३५
24. चतुर्थगे स्वजनकुटुम्बवृद्धयो ५८९ | छिक्करः कूटपूरी च ३९५
25. चत्वारिंशद्द्वियुता १४३ | छिन्द्याद्यदि न तरूंस्तान् ५२
26. चत्वारिंशद्धीना ६ | छिन्नाग्रेऽङ्गच्छेदः ४८५
27. चन्दनतुरुष्कभागौ ३२२ | छिन्नानुरूपयागम्य २२५
28. चन्द्रातपस्फटिकमौक्तिक १०४ | छेदो यद्यविकारी ६८
29. चपलश्चतुरो भीरुः ५