सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

पृष्ठ 494, कुल 760 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 494

४६६ बृहत्संहिता
उक्तमिदं हयचेष्टितमत ऊर्ध्वं दन्तिनां प्रवक्ष्यामि।
तेषां तु दन्तकल्पनभङ्गम्लानादिचेष्टाभिः ॥१५॥
इति श्रीवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां शाकुनेऽश्वेङ्गितं
नाम त्रिनवतितमोऽध्यायः ॥९३॥
यह घोड़ों की चेष्टायें कही गयी हैं। इसके बाद हाथियों की चेष्टायें कहता हूँ। उन
हाथियों के दाँतों का काँपना, टूटना, मलिन होना आदि चेष्टाओं से फल होते हैं।।१५।।
इति 'विमला' हिन्दीटीकायां शाकुनेऽश्वेङ्गिताध्यायस्त्रिनवतितमः ॥९३॥
इदं हयानामश्वानां चेष्टितं कथितम्, अतोऽस्मादूर्ध्वमनन्तरं दन्तिनां गजानां सम्प्रवक्ष्यामि
कथयिष्यामि। तेषां तु दन्तकल्पनेन दन्तभङ्गेनास्फोटनेन दन्तानां म्लानत्वेन वैकल्येन चेष्टया
चेष्टितेन। आदिग्रहणादन्यैः पार्थिवोपकरणादिभिः फलानि भवन्ति।।१५।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ शाकुनेऽश्वेङ्गितं
नाम त्रिनवतितमोऽध्यायः ॥९३॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA