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सर्वकोश
बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

बृहत्संहिता: द्वितीय भाग (आचार्य वराहमिहिर - विमला हिन्दी व्याख्या, पं. अच्युतानन्द झा)

Brihat Samhita Vol 2 with Vimala Hindi Commentary

आचार्य वराहमिहिर (टीकाकार: पं. अच्युतानन्द झा) द्वारा

DevanagariHindipublished760 पृष्ठ

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पृष्ठ 311

वस्त्रच्छेदलक्षणाध्यायः २८३
विवर्णितं तु यद्वस्त्रं विनश्येच्छेदमङ्गलम्।
विवर्णितं तु यच्च स्यादनर्थाय विनिर्दिशेत्।।
नवे वस्त्रे यथोक्तं स्यात् फलं जीर्णे तु नेष्यते।
न रक्ते न पुनर्धौते न स्वयं दग्धपाटिते।।
विलक्षणं त्यजेद्वस्त्रं समच्छेदमसङ्कुलम्।
विवर्णितं तु यद्वस्त्रं कुर्याद्देवद्विजार्चनम्।।
जपहोमोपवासांश्चैत् तथा नाप्नोति किल्विषम्।। इति।।१३।।
इति श्रीभट्टोत्पलविरचितायां संहिताविवृतौ वस्त्रच्छेदलक्षणं
नामैकसप्ततितमोऽध्यायः ।।७१।।
( विप्रमतादथ भूपतिदत्तं यच्च विवाहविधावभिलब्धम्।
तेषु गुणै रहितेष्वपि भोक्तुं नूतनमम्बरमिष्टफलं स्यात् ।।
बुरे नक्षत्रों में भी ब्राह्मणों की आज्ञा से, राजा का दिया हुआ वस्त्र या विवाह में
प्राप्त वस्त्र धारण करना शुभ फल देने वाला होता है। )
इति 'विमला'हिन्दीटीकायां वस्त्रच्छेदलक्षणाध्याय एकसप्ततितमः ।।७१।।
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA